मोहन भागवत ने जन संगोष्ठी कार्यक्रम के दौरान अपने भाषण में कहा कि पहले जाति का संबंध पेशे और काम से था, लेकिन बाद में इसने समाज में पैठ बना ली और भेदभाव का कारण बनी। 

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