हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर के पास कुल्लू सीमा से सटा कुशवा पंचायत का शाहदोहरी गांव आज भी बुनियादी सड़क सुविधा से वंचित है। आजादी के 76 वर्षों बाद भी यहां के ग्रामीणों को अपने बीमार परिजनों को पीठ पर उठाकर खड़ी ढलानों और खतरनाक पगडंडियों से होकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। हाल ही में सामने आए एक वीडियो ने ग्रामीणों की पीड़ा और जोखिम भरे हालात को उजागर कर दिया है। संतुलन बिगड़ने से हो सकता है हादसा वीडियो में साफ दिखता है कि यदि संतुलन जरा सा भी बिगड़ जाए, तो बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में सरकारी सहायता कहीं नजर नहीं आती और उन्हें केवल आपसी तालमेल के सहारे ही मरीजों को अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। बरसों से सड़क की मांग की जा रही है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। सामान ढोकर लाना बन चुका मजबूरी नतीजा यह है कि गांव तक राशन, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान भी पीठ पर ढोकर लाना मजबूरी बन चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार मरीज को ले जाते समय हर कदम पर जान का खतरा बना रहता है। खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए यह रास्ता और भी चुनौतीपूर्ण है। मतदान कर नोटा चुनने की चेतावनी ग्रामीणों ने प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से शाहदोहरी गांव को शीघ्र सड़क सुविधा से जोड़ने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो आगामी चुनावों में वे मतदान करेंगे, लेकिन किसी भी प्रत्याशी को नहीं, केवल नोटा को ही चुनेंगे। यह चेतावनी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए एक गंभीर संदेश है।