केंद्र सरकार द्वारा सेब पर आयात शुल्क (Import Duty) घटाने के फैसले ने हिमाचल प्रदेश के बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। सेब उत्पादक संघ किन्नौर के अध्यक्ष प्रेम कुमार ने रिकांगपिओ में एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि इस निर्णय से प्रदेश की 5,500 करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था पर सीधा और नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। संघ ने केंद्र सरकार के इस कदम को ‘बागवान विरोधी’ बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। प्रेम कुमार ने कहा कि आयात शुल्क कम होने से विदेशी सेब भारतीय बाजारों में सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे, जिससे हिमाचल के स्थानीय बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया, तो संघ प्रदेश भर के बागवानों को लामबंद कर सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा। न्यूजीलैंड के साथ समझौते पर उठाए सवाल: प्रेम कुमार ने विशेष रूप से न्यूजीलैंड को दी गई आयात रियायतों को ‘संदेह के घेरे’ में बताया। उन्होंने केंद्र की ‘दोहरी नीति’ की आलोचना करते हुए कहा, “एक ओर सरकार खुद को किसान हितैषी कहती है, वहीं दूसरी ओर विदेशी समझौतों के माध्यम से देश के अन्नदाताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है।” नीति पर पुनर्विचार की मांग: सेब उत्पादक संघ ने मांग की है कि केंद्र सरकार इस किसान विरोधी निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार करे। संघ जल्द ही हिमाचल प्रदेश सरकार के माध्यम से केंद्र तक अपना विरोध दर्ज कराएगा और इस फैसले को वापस लेने का दबाव बनाएगा।

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