हिमाचल हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव समय पर करवाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर आज भी सुनवाई जारी रहेगी। जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रोमेश वर्मा की बैंच के समक्ष मामले पर सुनवाई होगी। PIL में पंचायती राज संस्थाओं चुनावों को समय पर करवाने के आदेश जारी करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया कि संविधान में पंचायतीराज संस्थाओं का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव कराने का प्रावधान है। हिमाचल में यह कार्यकाल 30 जनवरी को पूरा हो रहा है। लिहाजा अब तक नए चुनाव की अधिसूचना जारी होनी थी। मगर ऐसा नहीं हो पाया। कमीशन ने 2 दिसंबर 2024 को ही आदेश जारी कर दिए थे चीफ जस्टिस की बैंच कह चुकी है कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि स्टेट इलेक्शन कमीशन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश ध्यान में रखते हुए, 02 दिसंबर 2024 को ही डायरेक्टर कम स्पेशल सेक्रेटरी पंचायती राज को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए थे, इनमें कहा गया कि पुनर्गठन, परिसीमन और आरक्षण की पूरी प्रक्रिया 30 जून 2025 तक पूरी कर ली जाए, ताकि आयोग चुनाव प्रक्रिया शुरू कर सके। मगर सरकार की तरफ से कार्रवाई नहीं की गई। 10 जुलाई के शहरी विकास विभाग के पत्र पर रोक 10 जुलाई 2025 को प्रधान सचिव (शहरी विकास) ने हिमाचल के सभी डीसी (लाहौल स्पीति और किन्नौर को छोड़कर) को एक पत्र जारी किया कि जनगणना में देरी के कारण, शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों के लिए आरक्षण रोस्टर जारी करके कार्यान्वयन/अंतिम रूप देने को तब तक के लिए स्थगित कर दिया जाना चाहिए, जब तक नवीनतम जनगणना डेटा उपलब्ध नहीं हो जाता। चुनाव आयोग ने उक्त पत्र को 11 जुलाई 2025 को अधिकार क्षेत्र के बिना जारी किया गया मानते हुए शुरू से ही शून्य घोषित कर दिया और सभी नगर पंचायतों, नगर परिषदों और नगर निगमों के संबंध में आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। आगे निर्देश दिया कि डीसी और अन्य कर्मचारी जो राज्य चुनाव आयोग के साथ प्रतिनियुक्ति पर होंगे, वे आयोग के पर्यवेक्षण और नियंत्रण के अधीन होंगे और ऐसे सभी आवश्यक कार्य करेंगे। 8 अक्टूबर को मुख्य सचिव ने सड़कें बहाल होने के बाद चुनाव का निर्णय इसके बाद, 08 अक्टूबर 2025 को मुख्य सचिव ने एक आदेश पारित किया, इसमें कहा- राज्य में पंचायती राज संस्थानों के चुनाव दिसंबर, 2025 और जनवरी, 2026 के महीने में होने थे, लेकिन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2025 की धारा 24(e) के तहत शक्ति का प्रयोग करते हुए पूरे राज्य में उचित कनेक्टिविटी बहाल होने के बाद ही चुनाव कराए जाएंगे। 10 नवंबर को डीसी का चुनाव सामग्री लेने से इनकार इसके बाद चुनाव आयोग ने 10 नवंबर 2025 को चुनाव सामग्री और मतपत्र एकत्र करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जिला स्तर पर तैनात करने के निर्देश जारी किए, जिन्हें आयोग के अधिकारियों द्वारा सरकारी प्रिंटिंग प्रेस, शिमला से पहुंचाया जाना था, लेकिन उक्त सामग्री की आपूर्ति नहीं की गई और संबंधित तैनात कर्मियों को वापस बुला लिया गया। 14 नवंबर को कमीशन बोला- 2546 पंचायतों में वोटर लिस्ट तैयार 14 नवंबर 2025 को एक अधिसूचना भी जारी की गई जिसमें उल्लेख किया गया था कि कुल 3577 ग्राम पंचायतों में से 3546 ग्राम पंचायतों और 17 शहरी स्थानीय निकायों के लिए मतदाता सूची तैयार कर ली गई है और शेष 29 ग्राम पंचायतों की सूची दिसंबर, 2025 में तैयार की जानी चाहिए। 17 नवंबर को मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू सीमाएं सील की चुनाव आयोग ने 17 नवंबर 2025 को एक और अधिसूचना जारी की कि संवैधानिक योजना के अनुसार चुनाव प्रक्रिया भारत के संविधान के अनुच्छेद 243E(1) और 243U(1) के तहत पांच साल के कार्यकाल की समाप्ति से छह महीने पहले शुरू होनी चाहिए और साथ ही मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट, 2020 को लागू करने का निर्देश दिया कि राज्य चुनाव आयोग द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद पंचायतों और नगरपालिकाओं की संरचना, वर्गीकरण या क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। पंचायतीराज विभाग अब ये तर्क दे रहा पंचायती राज विभाग का कहना था कि हाईकोर्ट की एक बैंच के निर्णय के मद्देनजर संबंधित व्यक्तियों/लोगों की आपत्तियों पर विचार करने के लिए और राज्य चुनाव प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ने में असमर्थ है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राज्य के संवैधानिक दायित्वों और सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए कानून के बारे में सही तथ्य दूसरी खंडपीठ के संज्ञान में नहीं लाए गए थे। चीफ जस्टिस की बैंच ने इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए इस याचिका को दूसरी खंडपीठ के समक्ष रखने के आदेश दिए थे। ऐसे में अब प्रदेशवासियों की नजरे हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी है। हिमाचल में पंचायत चुनाव तय समय पर होंगे या नहीं यह हाईकोर्ट तय करेगा।