हिमाचल के दो जिले शिमला ग्रामीण और किन्नौर जिला में अध्यक्ष की ताजपोशी खेमेबाजी की वजह से फंसती नजर आ रही है। शिमला ग्रामीण में कांग्रेस अध्यक्ष के लिए 25 और किन्नौर में 5 दावेदार है। इनमें कई नेता सीधे सीएम सुखविंदर सुक्खू खेमे से जुड़े हैं, जबकि कुछ का झुकाव होली लॉज की ओर है। कुछ चेहरे ऐसे भी हैं, जिनकी सीधी पहुंच दिल्ली में शीर्ष केंद्रीय नेताओं तक है। यही वजह है कि हाईकमान इन दोनों जिलों में किसी एक नाम पर मुहर लगाने से पहले कई स्तरों पर संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि दिल्ली में बैठे नेता दीपक राठौर और नेगी निगम भंडारी की वजह से इन दोनों जिलों में अध्यक्ष की ताजपोशी में पेंच फंसा है। इससे खासकर शिमला ग्रामीण में कांग्रेस अध्यक्ष का चयन रोचक मोड़ पर पहुंच गया है। यहां पर पांच बड़े चेहरे कांग्रेस अध्यक्ष की रेस में माने जा रहे हैं। सिलसिलेवार पढ़े किस नेता की दावेदारी मजबूत.. दीपक राठौर- ठियोग विधानसभा से संबंध रखने वाले दीपक राठौर शिमला ग्रामीण अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे गिने जा रहे हैं, क्योंकि वह दिल्ली में राहुल गांधी टीम का हिस्सा रहे हैं। वह लंबे समय तक राजीव गांधी पंचायतीराज संगठन से जुड़े रहे हैं। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में ठियोग में विद्या स्टोक्स का नामांकन रद्द होने के बाद पार्टी हाईकमान ने होली लॉज व वीरभद्र सिंह के विरोध के बावजूद दीपक राठौर को टिकट दिया था। सूत्र बताते हैं कि शिमला ग्रामीण में अध्यक्ष की ताजपोशी राठौर के कारण ही रुकी है, जबकि 11 अन्य जिलों में कांग्रेस हाईकमान पहले ही जिला अध्यक्षों की नियुक्ति कर चुका है। महेंद्र स्तान- महेंद्र स्तान कोटखाई से संबंध रखते हैं। पूर्व वीरभद्र सरकार में महेंद्र स्तान APMC शिमला-किन्नौर के चेयरमैन रह चुके हैं। महेंद्र स्तान होली लॉज के करीबी है। खासकर PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह के वह काफी करीबी है। रूपेश कंवल- रूपेश कंवल कुमारसैन क्षेत्र से संबंध रखते हैं। उन्हें पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह का करीबी माना जाता है। प्रतिभा सिंह ने रूपेश कंवल का नाम शिमला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष के लिए आगे बढ़ाया है। सुधीर आजाद- सुधीर आजाद सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी नेता है। सीएम ने सुधीर आजाद का नाम जिला अध्यक्ष के लिए आगे बढ़ाया है। आजाद दो बार शिमला में काउंस्लर रहे हैं और उन्होंने यूथ कांग्रेस में भी सुक्खू के साथ काम किया। यशपाल तनाइक- एससी समुदाय से जुड़े नेता है। वह, चौपाल विधानसभा क्षेत्र से संबंध रखते हैं। सूत्रों के अनुसार- कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष विनय सिंह भी यशपाल के नाम की पैरवी कर रहे हैं। इस वजह से उनकी दावेदारी को भी मजबूत माना जा रहा है। इसलिए, सरप्राइजिंग नाम हो सकता है तय पार्टी सूत्र बताते हैं कि इन नेताओं की मजबूत दावेदारी और खेमेबाजी की वजह से कांग्रेस हाईकमान सरप्राइजिंग नाम भी दे सकता है, क्योंकि इन नामों पर कई बार सहमति बनाने का प्रयास किया जा चुका है। मगर गुटबाजी की वजह से नाम फाइनल नहीं हो पा रहा। लिहाजा किसी गुट विशेष से संबंध न रखने वाला सरप्राइजिंग नाम अध्यक्ष के लिए फाइनल हो सकता है। संगठन सृजन अभियान ने बदली तस्वीर इस बार कांग्रेस हाईकमान ने संगठन सृजन अभियान के तहत पहली बार जिला और ब्लॉक स्तर तक ऑब्जर्वर लगाए। इनकी रिपोर्ट के आधार पर ही प्रदेश अध्यक्ष और 11 जिलों में अध्यक्ष लगाए गए। शिमला और किन्नौर जिला में भी ऑब्जर्वर की रिपोर्ट महत्वपूर्ण रहने वाली है। किन्नौर में जगत नेगी और निगम भंडारी आमने-सामने किन्नौर जिला में भी तस्वीर धुंधली है। पार्टी सूत्रों के अनुसार- किन्नौर में मंत्री जगत नेगी और युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष निगम भंडारी सीधे तौर पर आमने सामने हैं। जगत नेगी ने मौजूद उमेश नेगी, प्रेम कुमार और निर्मल चंद का नाम आगे किया है, जबकि निगम भंडारी को खुद भी जिला अध्यक्ष का बड़ा दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, निगम भंडारी अभी नेशनल यूथ कांग्रेस के सचिव और कर्नाटक यूथ कांग्रेस के प्रभारी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में उन्होंने राम सिंह नेगी का नाम भी आगे किया है। इन दोनों नाम पर मंत्री जगत नेगी मानने को तैयार नहीं है। इस वजह से हाईकमान दुविधा में है।

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