कांगड़ा जिले के धर्मशाला कॉलेज में स्टूडेंट पल्लवी की मौत के मामले में मंगलवार का दिन महत्वपूर्ण है। स्टूडेंट के पिता विक्रम आज धर्मशाला कोर्ट में जज के सामने बयान दर्ज कराएंगे। पोस्टमॉर्टम न होने के कारण पिता के ये बयान केस की सबसे मजबूत कानूनी कड़ी बनेंगे। पुलिस ने अदालत से विशेष आग्रह कर बयान दर्ज कराने का समय लिया है। पुलिस जांच अब पूरी तरह से ‘साइंटिफिक एविडेंस’ पर केंद्रित हो गई है। मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस ने उन सभी अस्पतालों का रिकॉर्ड खंगाला है जहां पल्लवी का इलाज हुआ था। पुलिस के पास अब तक पांच अस्पतालों का विवरण उपलब्ध है। मेडिकल बोर्ड का गठन ही एकमात्र रास्ता डीआईजी नॉर्थ जोन सौम्या सांबशिवन ने कहा कि पोस्टमॉर्टम के अभाव में मौत का कारण जानने के लिए ‘मेडिकल बोर्ड’ का गठन ही एकमात्र रास्ता है। हालांकि, पठानकोट के महाजन मेडिसिन अस्पताल का रिकॉर्ड मिलना अभी बाकी है। यह रिकॉर्ड मिलते ही मेडिकल बोर्ड अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा, जिससे वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की मेडिकल साइंस के आधार पर सत्यता तय होगी।
कॉलेज में अधिकतर समय अकेली रहती थी स्टूडेंट सरकार द्वारा गठित एसआईटी, जिसकी अध्यक्षता एडिशनल डायरेक्टर डॉ. हरीश कुमार कर रहे हैं, उन्होंने कॉलेज में जांच शुरू कर दी है। टीम ने जब सहपाठियों से पूछताछ की, तो एक नया तथ्य सामने आया।छात्रों ने बताया कि पल्लवी का व्यवहार सामान्य था, लेकिन वह कॉलेज में अधिकतर समय अकेली रहती थी। 72 घंटे में रिपोर्ट देगी एसआईटी एसआईटी अब उसके अकेलेपन की वजह—डर या स्वभाव—का पता लगाने का प्रयास कर रही है।रैगिंग के मुद्दे पर दो छात्रों ने कमेटी के सामने अपने बयान दर्ज करवाए हैं। एसआईटी को अपनी रिपोर्ट 72 घंटे (तीन दिन) के भीतर सरकार को सौंपनी है। पिता के बयान होंगे अहम सीआरपीसी की धारा 164 के तहत जज के सामने दिए गए बयान की कानूनी मान्यता पुलिस के सामने दिए गए बयान से कहीं ज्यादा होती है। चूंकि स्टूडेंट का अंतिम संस्कार हो चुका है और ‘डाइंग डिक्लेरेशन’ (वीडियो) पर सवाल उठाए जा रहे हैं, इसलिए पिता जो भी अदालत में कहेंगे, वही इस केस की दिशा और दशा तय करेगा।