भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) ने तथाकथित विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (VB-G RAM G Act 2025) की कड़ी निंदा की है। संगठन ने केंद्र सरकार से इस कानून को तत्काल और पूरी तरह रद्द करने की मांग की है। इंटक हिमाचल प्रदेश के उपाध्यक्ष बिहारी सेवगी ने कहा कि यह नया कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) 2005 को कमजोर करता है। उनके अनुसार, यह ग्रामीण गरीबों से रोजगार और बेरोजगारी भत्ते के कानूनी अधिकार को छीन लेता है। इंटक का आरोप है कि यह प्रतिगामी कानून एक वैधानिक अधिकार को सरकार की विवेकाधीन योजना में बदल देता है। इससे करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका असुरक्षित हो गई है। संगठन ने यह भी कहा कि अधिनियम संघीय ढांचे को कमजोर करता है और राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय व प्रशासनिक बोझ डालता है। इंटक ने दावा किया कि नए अधिनियम में 125 दिनों के रोजगार का दावा किया जाता है, लेकिन इसमें न तो रोजगार की गारंटी है और न ही बेरोजगारी भत्ते का अधिकार सुनिश्चित किया गया है। संगठन के अनुसार, मांग-आधारित और खुले वित्तपोषण वाली मनरेगा को अब सीमित बजट और केंद्रीकृत नियंत्रण वाली योजना में बदला जा रहा है। इससे ग्राम सभाओं की भूमिका समाप्त हो रही है, मजदूरी न्यूनतम वेतन से नीचे रखी जा रही है और डिजिटल उपस्थिति व जॉब-कार्ड “युक्तिकरण” के नाम पर बड़े पैमाने पर लोगों को बाहर किया जा रहा है। इंटक ने यह भी बताया कि खेती-कटाई के मौसम में काम सीमित कर कृषि मजदूरों को सस्ती मजदूरी के लिए मजबूर किया जा रहा है। इंटक ने केंद्र सरकार से VB-G RAM G Act 2025 को तत्काल रद्द करने, मनरेगा को बहाल करने, ग्रामीण श्रमिकों के लिए 200 दिनों का काम सुनिश्चित करने और मनरेगा के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषण की गारंटी देने की मांग की है।

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