राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के तहत धर्मशाला के हनुमान बस्ती नगर में मंडल स्तरीय हिंदू सम्मेलन संपन्न हुआ। यह आरएसएस द्वारा निर्धारित सात प्रमुख कार्यक्रमों की कड़ी में तीसरा आयोजन था। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज को संगठित, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता पर बल देना रहा। हवन-यज्ञ से हुआ शुभारंभ कार्यक्रम का शुभारंभ विश्व शांति और जनकल्याण की कामना के साथ आयोजित पावन हवन-यज्ञ से किया गया। इस अवसर पर प्रो. जय प्रकाश जय, प्रो. विजय शर्मा, श्रीमती नर्मदा, दीपक लहरिया और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी कृष्ण चंद्र ने उपस्थित जनसमूह को सामाजिक दायित्वों और हिंदू सम्मेलन की सार्थकता से अवगत कराया। मोबाइल के बढ़ते प्रचलन पर चिंता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग कार्यवाह सुशील जी और राष्ट्रीय सेविका समिति की जिला कार्यवाहिका नर्मदा ने भी अपने विचार साझा किए। नर्मदा ने बच्चों में मोबाइल के बढ़ते अत्यधिक उपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने अभिभावकों, विशेषकर महिलाओं से आग्रह किया कि वे नई पीढ़ी को इस डिजिटल कुरीति से दूर रखने के लिए जागरूक प्रयास करें। संगठन ही शक्ति मुख्य अतिथि एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी कृष्ण चंद्र ने कहा कि यह सम्मेलन समाज को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प का पुनः स्मरण है। उन्होंने राष्ट्रहित में जाति, वर्ग और भाषा के भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होने को समय की मांग बताया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का अर्थ केवल आर्थिक स्वावलंबन नहीं, बल्कि विचारों, संस्कारों और आचरण में भी स्वावलंबी होना है। सबके सुख की कामना: कृष्ण चंद्र ने कहा कि सनातन धर्म ने संपूर्ण विश्व को जोड़ने का संदेश ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ दिया है। इसकी परिकल्पना सनातन संस्कृति में ही देखने को मिलती है। भारत की आत्मा सनातन वैदिक धर्म में निहित है और भारत के गौरवशाली अतीत को समझने के लिए सनातन वैदिक परंपराओं का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। भारत की पहचान उसके सनातन संस्कारों से जुड़ी हुई है। सम्मेलन में संघ के कई पदाधिकारी उपस्थित थे

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