हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले की ग्राम पंचायत कल्पा ने बाहरी लोगों द्वारा क्षेत्र में की जा रही भूमि की खरीद-फरोख्त पर कड़ा रुख अपनाया है। पंचायत का आरोप है कि इन भू-सौदों के दौरान स्थानीय नियमों की अनदेखी की जा रही है और ग्राम पंचायत को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन ग्राम पंचायत प्रधान सरिता कुमारी की अध्यक्षता में ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त (DC) किन्नौर डॉ. अमित कुमार शर्मा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि कल्पा क्षेत्र में भूमि की बिक्री, हस्तांतरण या लीज के लिए ग्राम पंचायत का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) अनिवार्य किया जाए। पेसा (PESA) कानून के उल्लंघन का आरोप प्रधान सरिता नेगी ने बताया कि कल्पा, रादुले, सारयो और चिन्नी अव्वल जैसे राजस्व क्षेत्रों में भूमि बिक्री के समय ग्राम सभा से कोई अनुमति नहीं ली जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह स्थिति जनजातीय क्षेत्रों में लागू पेसा (PESA) कानून के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है। ग्राम सभा का सर्वसम्मत निर्णय पंचायत प्रधान ने जानकारी दी कि ग्राम सभा कल्पा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया है। इसके तहत अब राजस्व अधिकारियों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे भूमि की बिक्री, बंधक (Mortgage), पट्टा अनुबंध या लीज के माध्यम से होने वाले किसी भी हस्तांतरण से पहले ग्राम सभा की अनुमति लें। यह नियम उन सभी सौदों पर लागू होगा जिनमें भूमि का मालिकाना हक या जोतने वाला बदल जाता है।

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