हिमाचल प्रदेश में स्टेट इलेक्शन कमीशन द्वारा मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का क्लॉज 12.1 लगाने के बाद राज्य सरकार के तेवर नरम पड़ने लगे हैं। राज्य सरकार के दो उच्च अधिकारी आज बारी-बारी स्टेट इलेक्शन कमिश्नर अनिल खाची से मिलने पहुंचे। पहले, पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव सी पालरासू ने कमिश्नर ने मुलाकात की। उन्होंने चुनाव में देरी को लेकर सरकार का पक्ष इलेक्शन कमीशन के सामने रखा। कुछ देर बाद मुख्य सचिव संजय गुप्ता भी अनिल खाची से मिलने पहुंचे। उन्होंने बताया- सरकार किस वजह से अभी चुनाव नहीं चाह रही। सरकार, अभी पंचायतों का पुनर्गठन चाह रही है। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी सड़कें पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई। इसलिए, दोनों अधिकारियों ने इलेक्शन कमीशन से क्लॉज 12.1 हटाने का आग्रह किया। पहले इन अधिकारियों ने नहीं माने थे कमीशन के आदेश बता दें कि इलेक्शन कमिश्नर अनिल खाची ने कुछ दिन पहले मुख्य सचिव, सेक्रेटरी पंचायतीराज, सेक्रेटरी रेवेन्यू, सेक्रेटरी होम और डीजीपी को कुछ दिन पहले मीटिंग के लिए बुलाया था, ताकि यह पूछा जा सके कि सरकार चुनाव क्यों नहीं चाह रही। मगर कोई भी अधिकारी कमिश्नर द्वारा बुलाई मीटिंग में शामिल नहीं हुआ। इसी तरह, जिलों के डीसी ने भी कमीशन के आदेशों की बार बार अवहेलना की। कमीशन में कोड ऑफ कंडक्ट लगाकर सरकार को दिया था झटका इलेक्शन कमीशन ने जब अपनी शक्तियों का प्रयोग किया और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का एक क्लॉज लगाकर सरकार की पंचायतों के पुनर्गठन की मुहिम को झटका दिया। इसके बाद, सरकार कमीशन के आगे अपनी परेशानियां लेकर पहुंची है। अब हाईकोर्ट के पाले में गेंद सूत्र बताते हैं कि इलेक्शन कमीशन और दो अधिकारियों के बीच हुई इस मुलाकात के बाद अब चुनाव का फैसला हाईकोर्ट पर छोड़ दिया है, क्योंकि हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव में देरी से जुड़ी एक जनहित याचिका विचाराधीन है। इस बर 22 दिसंबर को फैसला होना है।