मंडी के लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज नेरचौक से एक साथ 41 डॉक्टरों के तबादले पर हिमाचल की सुक्खू सरकार घिर गई है। भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने कांग्रेस सरकार पर मंडी के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि करना सरकार के ‘सौतेले रवैया’ का ताजा उदाहरण है। जमवाल ने दावा किया कि यह फैसला मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की मंडी के संस्थानों को कमजोर करने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने दो दिन पहले मंडी में खुद को क्षेत्र का संरक्षक बताया था, लेकिन यह फैसला उनके बयानों के विपरीत है। मंडी को केवल उपेक्षा मिलीः भाजपा जमवाल ने आरोप लगाया कि सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल में मंडी को केवल उपेक्षा मिली है। उन्होंने सरदार पटेल विश्वविद्यालय का उदाहरण दिया, जिसे जय राम ठाकुर सरकार ने मंडी को शैक्षणिक पहचान देने के लिए स्थापित किया था। भाजपा नेता के अनुसार, कांग्रेस सरकार ने इस विश्वविद्यालय से 100 से अधिक कॉलेजों को अलग कर शिमला विश्वविद्यालय से जोड़ दिया है। जमवाल ने इसे मंडी की संस्थागत पहचान मिटाने का प्रयास बताया और कहा कि अब मेडिकल कॉलेज को भी कमजोर किया जा रहा है। ‘सौतेला रवैया’ अपना रही सरकार जमवाल ने आरोप लगाया कि सरकार मंडी के प्रति यह ‘सौतेला रवैया’ इसलिए अपना रही है क्योंकि मंडी की 10 में से 9 विधानसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का प्रतिनिधित्व है। जमवाल ने मुख्यमंत्री सुखु और उनकी सरकार पर ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ की भावना से काम करने का आरोप लगाया। जमवाल ने कहा कि मंडी में कोई नया संस्थान देने के बजाय, जो संस्थान पहले से चल रहे हैं, उन्हें या तो बंद किया जा रहा है या फिर उनका दर्जा घटाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का तबादला इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री मंडी की जनता से स्वास्थ्य सुविधाएं भी छीनना चाहते हैं। भाजपा बोली-अपना वादा याद करें सीएम राकेश जमवाल ने मुख्यमंत्री के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने मंडी की जनता से किसी भी क्षेत्र के साथ भेदभाव न करने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि आज के फैसले ने साबित कर दिया कि उनके शब्दों और कर्मों में विरोधाभास है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार लगातार मंडी के विकास कार्यों पर रोक लगा रही है और शैक्षणिक संस्थानों को कमजोर कर रही है।

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