हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में उपभोक्ता आयोग ने हिंदूजा फाइनेंस कंपनी के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह शिकायतकर्ता सत पॉल की गाड़ी तुरंत वापस करे और ₹2 लाख मुआवजा तथा ₹15 हजार मुकदमा खर्च अदा करे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि गाड़ी का लोन नंबर PJMHKGSV00075 अब पूरी तरह निपटाया हुआ (सेटल) माना जाएगा। आयोग ने कंपनी के आचरण को “बेईमानी” करार देते हुए कहा कि हिंदूजा फाइनेंस ने जानबूझकर महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए और अदालत में बार-बार अपना रुख बदला। आयोग ने पाया कि जब 31 मई 2022 को गाड़ी जब्त की गई, तो कंपनी के कर्मचारियों ने केवल एक चाबी ली थी, जबकि दूसरी चाबी शिकायतकर्ता के पास थी। इससे साबित हुआ कि कंपनी ने गाड़ी को अन्यायपूर्वक बेचा। आयोग की टिप्पणी: “साफ हाथों से नहीं आया विपरीत पक्ष” अपने आदेश में आयोग ने लिखा, “विपरीत पक्ष ने उपभोक्ता से सच्चाई छिपाई है, वह साफ हाथों से नहीं आया। यह स्पष्ट रूप से सेवा में कमी और बेईमानी का मामला है।” आयोग ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत यह मामला पूरी तरह वैध है, भले ही अनुबंध में आर्बिट्रेशन क्लॉज मौजूद हो। आयोग का निर्णायक आदेश पुलिस रिपोर्ट से खुली कंपनी की लापरवाही आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज है कि 2 अक्तूबर 2025 को पुलिस ने शिकायतकर्ता को सूचित किया कि उनकी गाड़ी जयसिंहपुर दशहरा मैदान के पास खड़ी है। हालांकि आयोग ने आपराधिक पहलू पर टिप्पणी नहीं की, लेकिन माना कि कंपनी ने गाड़ी जब्त करते समय जल्दबाजी और लापरवाही बरती थी।

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