हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के धर्मशाला को मैक्लोडगंज से जोड़ने वाले बाईपास पर भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। शनिवार देर शाम सड़क पर लगभग 50 मीटर लंबी गहरी दरार पड़ गई। इससे ऊपरी सुधेड़ गांव के कई घर धंसने की कगार पर हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने दोपहिया वाहनों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी है। लगातार खिसक रही सड़क स्थानीय निवासियों में भय का माहौल है। स्थानीय निवासी वीएस परमार ने बताया कि सड़क लगातार खिसक रही है, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। जून में भारी बारिश और अनियोजित जल निकासी के कारण सुरक्षा दीवारें टूटने से टनों मिट्टी नीचे गिर गई थी। अब यह भूस्खलन फिर से सक्रिय हो गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर सड़क को स्थिर करने के लिए क्रेटेड स्टोन डांगा लगाए गए थे। हालांकि नई दरार पड़ने से ये प्रयास भी विफल हो गए हैं। सड़क के नीचे की मिट्टी खिसकने के कारण यह हिस्सा अब हवा में लटक गया है। द्रव्यमान नीचे से संतुलन खो चुका भू-विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. आर.के. सिंह के अनुसार, यह एक “डीप-सिटेड रोटेशनल स्लाइड” है। उन्होंने बताया कि ऊपरी मिट्टी का पूरा द्रव्यमान नीचे से अपना संतुलन खो चुका है। डॉ. सिंह ने चेतावनी दी कि बिना वैज्ञानिक सर्वेक्षण और डी-वाटरिंग सिस्टम के कोई भी मरम्मत केवल अस्थायी समाधान होगी। ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया उन्होंने मिट्टी की परत, जलस्तर और वहन क्षमता का तुरंत जियो-टेक्निकल सर्वे कराने की सलाह दी है। इसके अतिरिक्त, सड़क के नीचे हॉरिजेंटल ड्रेनेज बोर होल और घरों की सुरक्षा के लिए माइक्रो-पाइलिंग या ग्राउंड एंकरिंग जैसे स्थायी ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। मैक्लोडगंज और धर्मशाला की जीवनरेखा स्थानीय निवासियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHA) से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यह रास्ता केवल एक सड़क नहीं, बल्कि मैक्लोडगंज और धर्मशाला की जीवनरेखा है। लोगों ने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपील की है ताकि इस बढ़ते खतरे को टाला जा सके।