हिमाचल प्रदेश के मनाली में श्रीमद्भगवद्गीता बांट रहे इस्कॉन भक्त मोहन हरिदास (वृंदावन) को रोके जाने के बाद स्थानीय प्रशासन और इस्कॉन के बीच विवाद बढ़ गया है। इस्कॉन कटराईं के अध्यक्ष जितेंद्र ठाकुर ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए सोशल मीडिया पर प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए हैं। इस्कॉन भक्त मोहन हरिदास ने आरोप लगाया है कि मनाली में गीता वितरण के दौरान एसडीएम रमन शर्मा के निर्देश पर पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने उनके साथ अभद्रता की। हरिदास के अनुसार, पुलिस ने उनसे गीता की प्रतियां और उनका मोबाइल फोन छीन लिया। पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर कहा कि वे मनाली या आसपास के क्षेत्र में प्रचार-प्रसार नहीं कर सकते। हालांकि, एसडीएम रमन शर्मा ने इन आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि गीता वितरण के लिए भक्तों द्वारा कोई अनुमति नहीं ली गई थी। विधायक ने किया हस्तक्षेप मामले ने तूल पकड़ने पर मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ ने हस्तक्षेप किया। उनके प्रयासों के बाद पुलिस ने जब्त की गई गीता की प्रतियां और मोहन हरिदास का मोबाइल फोन वापस कर दिया। इस्कॉन के भक्त इस मुद्दे पर चर्चा के लिए शनिवार, 8 नवंबर, 2025 को विधायक भुवनेश्वर गौड़ से मुलाकात करेंगे। इस्कॉन कटराईं के अध्यक्ष जितेंद्र ठाकुर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर प्रशासन से सवाल किया है। उन्होंने पूछा, “क्या भारत में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए प्रशासन की अनुमति लेनी पड़ेगी?” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस्कॉन विश्वभर में सनातन धर्म का प्रचार कर रहा है। इस घटना को लेकर इस्कॉन की राज्य और केंद्र इकाइयों ने कड़ा रुख अपनाया है।