हिमाचल प्रदेश में बिना संगठन के कांग्रेस की आज सालगिरह है। बीते साल आज ही के दिन राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस संगठन भंग किया। तब कहा गया कि जल्द नया संगठन खड़ा कर दिया जाएगा। मगर पूरा एक साल बीतने के बाद भी कांग्रेस हाईकमान संगठन नहीं बना पाया। प्रदेश में दिसंबर व जनवरी में कांग्रेस को पंचायत और नगर निकाय चुनाव लड़ने है। हालांकि, पंचायत चुनाव पार्टी सिंबल पर नहीं होते। मगर नगर निगम के चुनाव पार्टी चिन्ह पर होते हैं। बिना संगठन के कौन और कैसे चुनाव लड़ेगा, राज्य के नेताओं को यह चिंता सता रही है। पार्टी के अंदर ही यह चिंता उठने लगी है कि बिना संगठन के चुनाव लड़ना ‘आत्मघाती कदम’ साबित हो सकता है। भाजपा ने 24576 पदाधिकारियों की फौज खड़ी की वहीं, प्रदेश में भाजपा ने पार्टी के साथ साथ सात मोर्चा और प्रकोष्ठ में राज्य, जिला, ब्लॉक स्तर व बूथ स्तर पर 24 हजार 576 पदाधिकारियों की लंबी फौज खड़ी कर दी है, जबकि कांग्रेस में इस वक्त अकेली प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह है। यह स्थिति प्रदेश कांग्रेस के इतिहास में अभूतपूर्व है। हाईकमान ने राज्य, जिला व ब्लॉक कार्यकारिणी डिजॉल्व है। इससे, पार्टी वर्कर मायूस है। पुराने नेता भी अब हाशिये पर महसूस कर रहे हैं। कांग्रेस दफ्तर में पूरे एक साल से सन्नाटा पसरा है। दिल्ली में हुईं बैठकें, नतीजा ‘शून्य’ कांग्रेस के नए अध्यक्ष के साथ साथ संगठन बनाने के लिए पिछले एक साल में दिल्ली में कई बैठकें हुईं। पार्टी हाईकमान ने राज्य की स्थिति समझने के लिए ऑब्जर्वर भी कई बार हिमाचल भेजे। इन्होंने पूर्व प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और वर्तमान में पार्टी की प्रभारी रजनी पाटिल को रिपोर्ट भी दी। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर कुछ नहीं बदल पाया। इन नेताओं के नाम अध्यक्ष के लिए उछाले गए कांग्रेस अध्यक्ष के लिए जरूर 10 नेताओं के नाम समय समय पर उछाले जाते रहे। इनमें शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, विधायक कुलदीप राठौर, विनय कुमार, आशीष बुटेल, संजय रत्न, विनोद सुल्तानपुरी, संजय अवस्थी, सुरेश कुमार और आखिरी में आरएस बाली का नाम भी उछाला गया। मगर फैसला नहीं हो पाया। गुटबाजी बनी सबसे बड़ी दीवार कांग्रेस अध्यक्ष और संगठन के गठन में सबसे बड़ा रोड़ा गुटबाजी मानी जा रही है। एक ओर सीएम सुक्खू का कैंप है, तो दूसरी ओर होली लॉज खेमा सक्रिय है। राजनीतिक के जानकार मानते हैं कि संगठन की कमी सरकार के कामकाज पर भी असर डाल रही है। सत्तारूढ़ दल को विभिन्न मसलों पर जब विपक्ष हमलावर होता है तो सरकार को डिफेंड करने के लिए कांग्रेस के पास नेता है। कांग्रेस के सीनियर नेता पार्टी को पैरालाइज्ड-डेडवुड बता चुके हैरानी इस बात की है कि प्रदेश कांग्रेस के सीनियर नेताओं ने एक-दो नहीं अनगिनत बार नया संगठन जल्दी बनाने की हाईकमान से पैरवी की है। सुक्खू सरकार में मंत्री चंद्र कुमार ने इसी वजह से संगठन को पैरालाइज्ड तक बोल दिया था। कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विप्लव ठाकुर कांग्रेस को डेडवुड बता चुकी हैं। मौजूदा अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने भी कई बार हाईकमान से संगठन जल्दी बनाने का आग्रह किया। मगर कांग्रेस हाईकमान के कानों पर जू तक नहीं रेंगी। छह बार की विधायक आशा कुमार कह चुकी है कि प्रदेश में अब अपने आपको कोई भी कांग्रेस कहलाने को तैयार नहीं है।

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