हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 26 नवंबर से शुरू होगा। धर्मशाला के तपोवन में पांच दिसंबर तक चलने वाले इस शीत सत्र में 8 बैठकें होगी। यह आज तक का सबसे लंबा शीत सत्र होगा। पूर्व में शीत सत्र में चार से छह बैठकें होती रही है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद विधानसभा सचिवालय प्रशासन ने आज शीत सत्र की तारीख तय कर दी है। इसी के साथ अब सभी विधायक अपने सवाल ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से विधानसभा सचिवालय प्रशासन को दे सकेंगे। इसके बाद, विधानसभा सचिवालय इन सवालों को जवाब के लिए संबंधित विभागों को भेजेगा। इस बार जल्दी बुलाया गया सत्र पूर्व में शीत सत्र दिसंबर के तीसरे या आखिरी सप्ताह में होता आया है। मगर इस बार पर्यटन सीजन को देखते हुए सत्र जल्दी बुलाने का फैसला लिया गया है, क्योंकि शीत सत्र के लिए पूरी सरकार शिमला से धर्मशाला जाती है और 15 दिसंबर के बाद धर्मशाला में बड़ी संख्या में टूरिस्ट पहुंचता है। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा- दिसंबर के आखिरी सप्ताह में क्रिसमस न्यू ईयर सेलिब्रेशन होता है। इस दौरान धर्मशाला में टूरिस्ट भी बहुत ज्यादा आता है। इसे देखते हुए जल्दी सत्र बुलाने का फैसला लिया है। शोकोद्गार से होगी सत्र की शुरुआत सत्र की शुरुआत 26 नवंबर को सुबह 11 बजे शोकोद्गार के साथ होगी। चार दिसंबर को प्राइवेट मेंबर डे रखा गया है। शीत सत्र में गूंजेंगे ये मुद्दे विधानसभा के शीत सत्र में इस बार आपदा के मुद्दे पर तपिश देखने को मिल सकती है। भारतीय जनता पार्टी बार बार कांग्रेस सरकार पर आपदा प्रभावितों की मदद में पिक एंड चूज करने और प्रभावित परिवारों को राहत नहीं देने के आरोप लगा रही है। इस मुद्दे पर शीत सत्र में खूब तपिश देखने को मिलेगी। विधानसभा में रोजगार, मार्केटिंग बोर्ड और एपीएमसी में भ्रष्टाचार, महिलाओं को 1500 रुपए, बिगड़ती कानून व्यवस्था और धारा 118 में बदलाव जैसे मुद्दे इस बार सदन में गूंजेगे।

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