नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) चंडीगढ़ ने साइकोट्रोपिक टैबलेट और कोडीन आधारित कफ सिरप की बोतलों के अवैध निर्माण व सप्लाई के मामले में बड़ा एक्शन किया है। एनसीबी ने काला अंब (हिमाचल प्रदेश) स्थित मैसर्स डिजिटल विजन फार्मा के साझेदार अनुज कुमार सिंह निवासी रुड़की को गिरफ्तार किया है। एनडीपीएस कोर्ट अमृतसर में पेश कर 5 दिन के रिमांड पर लिया है। एनसीबी के मुताबिक ने कहा कि यह गिरफ्तारी फार्मा कंपनियों के नेटवर्क और ड्रग्स माफिया के बीच संबंधों की जांच में एक बड़ा ब्रेक थ्रू साबित हो सकती है। इससे नशीली दवाओं और दूसरे नशे की तस्करी के नेटवर्क को खत्म करने में मदद मिलेगी। हिमाचल व उत्तराखंड में हैं कंपनियां एनसीबी अधिकारियों के मुताबिक, अनुज की गिरफ्तारी से यह खुलासा हुआ है कि दवा बनाने वाली फैक्ट्रियों और अवैध शराब तस्करी के बीच रिश्ता है। इस साल फरवरी में एनडीपीएस कानून के तहत दर्ज एक मामले की जांच में हिमाचल प्रदेश की डिजिटल विजन फार्मा और उत्तराखंड की दो कंपनियों का नाम सामने आया था। जांच में पता चला कि ये कंपनियां नशे में इस्तेमाल होने वाली गोलियां और कोडीन वाला सिरप अवैध रूप से बनाती थी और उन्हें पंजाब, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में ऐसी फर्जी फर्मों को भेजती थी जो असल में मौजूद नहीं थीं। 15 की हो चुकी है गिरफ्तारी अब तक इस मामले में 15 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एनसीबी ने ऑपरेशन के दौरान 21.88 लाख साइकोट्रोपिक टैबलेट, 10.57 लाख सीबीसीएस सिरप बोतलें और 1002 किलोग्राम कच्चा माल जब्त किया है। यह कार्रवाई 11 महीनों से 7 राज्यों में चल रहे एनसीबी ऑपरेशन का हिस्सा है, जिसमें अब तक 547 करोड़ रुपए से अधिक की ड्रग्स बरामद की जा चुकी हैं। कफ सीरप से कश्मीर में 12 बच्चों की मौत हुई गौरतलब है कि काला अंब स्थित डिजिटल विजन फार्मा का नाम एफआईआर नंबर 21/2020, थाना काला अंब में पहले ही दर्ज है। इसी कंपनी द्वारा निर्मित मिलावटी कफ सिरप ‘कोल्ड बेस्ट-पीसी’ पीने से जम्मू-कश्मीर में 12 बच्चों की मौत हुई थी। वर्ष 2020 में आरोपी अनुज डिजीटल विजन फार्मा में महाप्रबंधक के पद पर कार्यरत था, जबकि वर्ष 2022 में वह कंपनी का साझेदार बन गया। आरोपी के खिलाफ एफआईआर नंबर 33/22, थाना राम नगर (जम्मू-कश्मीर) में भी मामला दर्ज है।

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