हिमाचल सरकार, राज्य की सभी पंचायतों में पुनर्गठन (री-ऑर्गेनाइज) की प्रक्रिया कम्पलीट कर चुकी है। इसी तरह, 3577 में से 3548 पंचायतों, 92 पंचायत समितियों (BDC) में से 91 BDC और 12 में से 11 जिला परिषद का डिलिमिटेशन भी कर दिया गया। फिर भी, सरकार ने दोबारा से पंचायतों के पुनर्गठन का फैसला लिया है। इससे, सरकार की टाइमिंग और मंशा पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि इलेक्शन कमीशन एक साल से सरकार को पंचायतों के पुनर्गठन को लिख रहा है। कमीशन ने पंचायतों के पुनर्गठन के लिए 23 अक्टूबर 2024 को पहला पत्र सरकार को लिखा था। इसमें, 31 मार्च 2025 तक पुनर्गठन का काम पूरा करने की डेडलाइन दी गई। इन निर्देशों के बाद सभी जिलों के डीसी ने पंचायतों के पुनर्गठन और इसके बाद डिलिमिटेशन का काम पूरा किया। सभी जिलों के डीसी ने इलेक्शन कमीशन को लिखकर दे रखा है कि पंचायतों के पुनर्गठन और डिलिमिटेशन का काम पूरा कर दिया गया है। पंचायतीराज विभाग चुनाव को हो गया था तैयार इसके बाद, पंचायतीराज विभाग के डायरेक्टर कम स्पेशल सेक्रेटरी ने भी सभी जिलों के डीसी को 25 सितंबर 2025 तक एक पत्र लिखा, इसमें कहा कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार, हर हाल में आरक्षण रोस्टर 25 सितंबर तक लग जाना चाहिए। यानी पंचायतीराज विभाग भी चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार था। मगर, सरकार ने चुनाव की घोषणा से कुछ दिन पहले ही पंचायतों के पुनर्गठन का फैसला लेकर सबको चौकाया है। पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की गई तो दो से ढाई महीना इस प्रोसेस में लग जाएगा। इसके बाद डिलिमिटेशन, वार्डबंदी, आरक्षण रोस्टर और वोटर लिस्ट बनाने का काम नए सीरे से शुरू करना पड़ेगा। अभी यह सारी एक्सरसाइज हो चुकी है। सभी जिलों में 95 प्रतिशत से ज्यादा डिलिमिटेशन पूरा हो चुका है। वार्डबंदी भी हो चुकी है। डीसी ने आरक्षण रोस्टर भी तय कर दिया है। सिर्फ नोटिफाई करना बाकी है। चुनाव टले तो इलेक्शन कमीशन की मेहनत पर फिरेगा पानी स्टेट इलेक्शन कमीशन ने राज्य की सभी 3577 पंचायतों में वोटर लिस्ट भी लगभग तैयार कर दी है। 13 नवंबर को इनका फाइनल ड्रॉफ्ट-रोल पब्लिश होना है। पंचायत चुनाव के लिए 3 करोड़ पोस्टल बैलेट भी छपवाएं जा चुके है। इन चुनाव के लिए पोलिंग स्टेशन भी तय हो चुके हैं। राज्य के सभी 12 जिलों में डीसी, एसडीएम, तहसीलदार, पंचायत इंस्पेक्टर, पंचायत सचिव छह महीने से चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए हैं। ऐसे में यदि अब पुनर्गठन करके नए सीरे से पंचायतों की सीमाएं तय की गई तो वार्ड व पंचायत वाइज बनी वोटर लिस्ट बेकार हो जाएगी। यह सारी एक्सरसाइज कमीशन को दोबारा करनी पड़ेगी। इसमें करोड़ों रुपए दोबारा फूंकने पड़ेंगे। 23 जनवरी 2026 को पूरा हो रहा कार्यकाल हिमाचल में मौजूदा पंचायत जन प्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल 23 जनवरी 2026 को पूरा हो रहा है। इलेक्शन कमीशन को हर हाल में इससे पहले चुनाव कराने है। यह संवैधानिक बाध्यता है। इस वजह से इलेक्शन कमीशन हर हाल में चुनाव कराना चाह रहा है। मगर सरकार अभी इसके लिए तैयार नहीं लग रही है। इसी वजह से बीते दिनों मुख्य सचिव ने डिजास्टर एक्ट का हवाला देते हुए आपदा से हालात सामान्य होने के बाद चुनाव कराने की बात कही है। हालांकि, राज्य के पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह पुनर्गठन के बाद भी तय समय पर चुनाव कराने का दावा कर रहे है। सरकार-इलेक्शन कमीशन में हो सकती है टकराव की स्थिति इस बीच स्टेट इलेक्शन कमीशन ने बीते शनिवार को सभी जिलों के डीसी को पत्र लिखकर चुनाव के लिए तैयारियां करने के निर्देश दे दिए है। इससे आने वाले दिनों में सरकार और इलेक्शन कमीशन में टकराव की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

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