काशी की तर्ज पर इस वर्ष भी छोटी काशी यानी मंडी में देव दिवाली का आयोजन किया जाएगा। ब्यास आरती कमेटी द्वारा 5 नवंबर को ब्यास नदी के डुगलेश्वर घाट पर यह पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर नदी तट और डुगलेश्वर महादेव मंदिर के पास 1500 दीपक जलाए जाएंगे। बाबा भूतनाथ मंदिर के महंत देवानंद सरस्वती ने बताया कि देव दिवाली का यह आयोजन हर वर्ष की तरह इस बार भी किया जा रहा है। महंत देवानंद सरस्वती के अनुसार, पौराणिक कथाओं में त्रिपुरासुर नामक राक्षस के आतंक का उल्लेख है। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने उसका वध कर सभी को मुक्ति दिलाई थी। इसके बाद जब भगवान शिव काशी लौटे, तो देवताओं और मनुष्यों ने दीपक जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से देव दीपावली मनाने की परंपरा चली आ रही है। यह पर्व सामान्य दीपावली से भी पहले का माना जाता है और उत्तर मध्य भारत में इसे बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। इसी के साथ, भीष्म पंचक के अवसर पर भी धार्मिक गतिविधियां देखने को मिलीं। खरीदारी के लिए बाजारों में उमड़ रही भीड़ आज बाजारों में पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए भीड़ देखी गई, जिसमें लोग आंवला, गन्ना और अन्य फसलें खरीदते नजर आए। कई स्थानों पर तुलसी पूजन भी किया गया। मान्यता है कि भीष्म पंचक के इन पांच दिनों में उपवास, पूजा-अर्चना और जल अर्पित करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इन दिनों में किए गए पूजा, व्रत, दान और जप का फल सामान्य दिनों की तुलना में हजार गुना अधिक होता है। प्रत्येक पुण्यकर्म एकादशी व्रत के समान फल प्रदान करता है।