हिमाचल कैबिनेट के आखिरी वक्त में पंचायतों के पुनर्गठन के फैसले से तय समय में पंचायत चुनाव पर तलवार लटक गई है। स्टेट इलेक्शन कमीशन की चुनाव की तैयारियों पर भी पानी फिरता नजर आ रहा है। विपक्ष ने सरकार पर चुनाव में हार के डर से भागने का आरोप लगाया है। सूत्र बताते हैं कि स्टेट इलेक्शन कमीशन सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देगा, क्योंकि पांच साल से पहले चुनाव कराना संवैधानिक बाध्यता है। इस वजह से इलेक्शन कमीशन 10 महीने पहले ही सरकार को पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन के लिए लिखता रहा है। इलेक्शन कमीशन खुद भी तीन-चार महीने से चुनाव की तैयारियों में जुटा है। 3 करोड़ पोस्टल बैलेट छापे जा चुके हैं। सारी इलेक्शन सामग्री सभी जिलों के डीसी को दे दी गई है। अब वोटर लिस्ट बनाने का काम भी अंतिम चरण में है। 13 नवंबर को वोटर लिस्ट का फाइनल ड्राफ्ट पब्लिश होना है। इसके बाद, कभी भी चुनाव की घोषणा और आचार संहिता संभावित थी। मगर कैबिनेट के ताजा फैसले के बाद अब यह मामला अदालतों में उलझ सकता है। पुनर्गठन हुआ तो तय समय पर नहीं होंगे चुनाव वहीं राज्य के पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह पुनर्गठन के फैसले के बावजूद तय समय पर चुनाव कराने के दावे कर रहे हैं। व्यावहारिक रूप से यह बिल्कुल संभव नहीं है, क्योंकि पंचायतों के पुनर्गठन व पुनर्सीमांकन और नए सीरे से वोटर लिस्ट बनाने के प्रोसेस में कम से कम ढाई से तीन महीने का वक्त लगता है। पुनर्गठन व पुनर्सीमांकन के बाद वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट रोल दोबारा से ग्रामसभा में रखना होगा। इसके बाद फाइनल वोटर लिस्ट बनाने का काम शुरू होगा। इस पर आपत्ति एवं सुझाव आमंत्रित करने होंगे। यह सारी एक्सरसाइज पहले भी की जा चुकी है। अब दोबारा से करनी होगी। सेक्रेटरी पंचायतीराज ने भी आरक्षण रोस्टर लगाने के निर्देश दिए स्टेट इलेक्शन कमीशन के साथ साथ पंचायतीराज विभाग भी चुनाव की तैयारियों में जुटा था। इसे देखते हुए सेक्रेटरी पंचायतीराज विभाग ने भी सभी जिलों के डीसी को 25 सितंबर तक आरक्षण रोस्टर लगाने के निर्देश दिए थे, ताकि पंचायत चुनाव समय पर कराए जा सके। पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह भी बार बार तय समय पर चुनाव कराने की बात करते रहे। मगर कैबिनेट के फैसले ने सबको चौकाया है। 23 जनवरी तक चुनाव कराना संवैधानिक बाध्यता वहीं मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल 23 जनवरी को पूरा हो रहा है। स्टेट इलेक्शन कमीशन को 23 जनवरी से पहले हर हाल में चुनाव कराने है। यह संवैधानिक बाध्यता है। प्रदेश में 3577 पंचायतें है। इनमें प्रधान, उप प्रधान, वार्ड मेंबर, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद के लिए चुनाव होने हैं। कमिश्नर बोले- ऑर्डर स्टडी के बाद प्रतिक्रिया देंगे स्टेट इलेक्शन कमिश्नर अनिल खाची ने बताया कि सरकार के फैसले को पहले स्टडी किया जाएगा। इसके बाद कोई प्रतिक्रिया दी जाएगी।

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