धर्मशाला स्मार्ट सिटी की 24.92 करोड़ रुपए की स्ट्रीट लाइट परियोजना पर केंद्र सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं। 30 लाख रुपए की ‘स्पेशल रिपेयर’ और घटिया काम का खुलासा होने के बाद केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने यह कदम उठाया है। स्मार्ट सिटी मिशन के संयुक्त निदेशक विवेक कुमार ने 17 अक्तूबर को हिमाचल शहरी विकास निदेशालय और धर्मशाला स्मार्ट सिटी लिमिटेड (DSSL) के सीईओ को तत्काल जांच करने और रिपोर्ट सौंपने के निर्देश जारी किए हैं। चोरी-भ्रष्टाचार के आरोप मामला सी.पी.जी.आर.ए.एम.एस. पर दर्ज शिकायत (DOURD/E/2025/0012906) से संबंधित है। स्थानीय निवासी ने 19 अगस्त 2025 को यह शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें तार चोरी, घटिया गुणवत्ता, भ्रष्टाचार और धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नई लाइटों में पुरानी और सस्ती तारों का इस्तेमाल शिकायत में बताया गया है कि 16 जुलाई को परियोजना का ठेका लेने वाली कंपनी एचपीएल इलेक्ट्रिकल एंड पावर लिमिटेड के कर्मचारी नगर निगम की पुरानी तारें चोरी करते हुए पकड़े गए थे। आरोप है कि नई लाइटों में पुरानी और सस्ती तारों का इस्तेमाल किया जा रहा है। नगर निगम की मेयर नीनू शर्मा ने भी सार्वजनिक रूप से लाइटों की खराब गुणवत्ता को स्वीकार किया था। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर जयप्रकाश गौड़ ने उन्हें फोन पर गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, 7000 लाइटों की इस योजना में अब तक केवल 6500 लाइटें ही लग पाई हैं, जिनमें से 30 प्रतिशत खराब हैं। 30 लाख रुपए ‘रिपेयर’ के नाम पर खर्च इसके बावजूद, 30 लाख रुपए ‘रिपेयर’ के नाम पर खर्च किए गए हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच रिपोर्ट शिकायतकर्ता को भी उपलब्ध कराई जाए और मंत्रालय को भी भेजी जाए। इस बीच, शहरवासी अब इस परियोजना के तकनीकी और वित्तीय ऑडिट की मांग कर रहे हैं।

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