लाहौल घाटी में समय से पहले हुई भारी बर्फबारी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। घाटी में अभी भी 75 से 80 प्रतिशत बीज आलू की फसल खेतों में पड़ी है, जबकि सेब की शत-प्रतिशत फसल पेड़ों पर ही है। इस अप्रत्याशित बर्फबारी के कारण दोनों प्रमुख नकदी फसलों पर संकट मंडरा रहा है। देशभर में बीज आलू के लिए प्रसिद्ध लाहौल का आलू इस समय खेतों में बर्फ की सफेद चादर के नीचे दब रहा है। किसानों ने अधिकांश आलू की फसल मिट्टी से निकाल ली है, लेकिन बोरियों में भरकर अभी भी खेतों में ही रखा है। खुले में पड़ी इन बोरियों पर बर्फबारी होने से आलू के खराब होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है। दोहरी मार से परेशान किसान सेब की फसल पूरी तरह से पक कर तैयार है। बर्फबारी के कारण पेड़ों की टहनियां टूटने के डर से बागवानों ने बर्फबारी के बीच ही सेब तोड़ना शुरू कर दिया है। यह स्थिति पहले से ही आपदा से प्रभावित सब्जियों की नकदी फसलों के नुकसान के बाद आई है, जिससे लाहौल के किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। लाहौल पोटेटो सोसाइटी के चेयरमैन सुदर्शन जस्पा ने बताया कि अभी तक केवल 20 से 25 प्रतिशत आलू ही लाहौल से बाहर भेजा जा सका है, जबकि 75 से 80 प्रतिशत आलू अभी भी घाटी में ही है। उन्होंने आशंका जताई कि खुले में पड़े आलू पर बर्फ लगने से उसके खराब होने की बहुत अधिक संभावना है, जिससे किसानों को करोड़ों रुपए का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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