हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड (HPSEB) के 3 पूर्व इंजीनियरों और मैसर्स गिलवर्ट इस्पात प्राइवेट के 2 निदेशकों पर विजिलेंस ने FIR की है। यह मामला HPSEB चेयरमैन संजय गुप्ता की शिकायत पर दर्ज किया गया है। इससे बिजली बोर्ड में हड़कंप मच गया है। सूचना के अनुसार, बद्दी में कई साल पहले मैसर्स गिलवर्ट इस्पात प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी चल रही थी। इस कंपनी ने बिजली के बिल का भुगतान नहीं किया। बिल अमाउंट अधिक होने पर बोर्ड अधिकारियों ने कंपनी का बिल इकट्ठा लेने के बजाय इंस्टालमेंट में कर दिया और कंपनी का बिजली मीटर दोबारा चालू कर दिया। इसके बाद, कंपनी ने बिल के भुगतान के चेक देने शुरू किए। बाद में चेक भी बाउंस हो गए। कुछ समय बाद कंपनी डिफॉल्ट हो गई और बोर्ड अधिकारी कंपनी की जेब से बिजली बिल का पैसा नहीं वसूल पाए। इस कंपनी का लगभग 11.84 करोड़ रुपए का बिल पेंडिंग बताया जा रहा है। बिजली बोर्ड के इन इंजीनियरों पर FIR इस मामले में बिजली बोर्ड के चेयरमैन संजय गुप्ता ने राजेश कुमार ठाकुर, तत्कालीन चीफ इंजीनियर (आपरेशन), अनूप धीमान तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (आपरेशन), वाईआर शर्मा, तत्कालीन चीफ इंजीनियर (कॉमर्शियल), मैसर्स गिलवर्ट इस्पात प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अभिनव मौदगिल, उमेश मौदगिल और बिजली बोर्ड के अन्य अज्ञात अधिकारियों व कर्मचारियों पर मामला दर्ज कराया है। यानी जांच में जैसे जैसे दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के नाम सामने आएंगे, उन्हें भी इस केस में नामजद किया जाएगा। बता दें कि, बिजली बोर्ड के एमडी ने मार्च माह में अतिरिक्त मुख्य सचिव होम डिपार्टमेंट को इस मामले की जांच के लिए पत्र लिखा था। विजिलेंस द्वारा प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी पाए जाने के बाद विजिलेंस ने आज FIR की है।

Spread the love