हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में एक होटल के 120 नए कमरों के निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नायब तहसीलदार मोहम्मद यासीन की रिपोर्ट में शुक्रवार देर शाम को कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस जमीन पर होटल का निर्माण किया जा रहा है, वह पहले जंगल और चरवाहों की थी। इस जगह को पहाड़ी काटकर समतल किया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह निर्माण नगर नियोजन, पर्यावरण कानून और वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन करता है। घटना धर्मशाला में मैसर्स आत्मन रिसोर्ट एंड कॉटेज के होटल की है। जमाबंदी 2019-20 के रिकॉर्ड के अनुसार, विवादित भूमि के खसरा नंबर 01 पर पहले से होटल मौजूद है। आंशिक रूप से जंगल के रूप में दर्ज जमीन
वर्तमान निर्माण बंजर कदीम भूमि पर हो रहा है, जिसका रकबा 00-50-70 है। इस जमीन में खसरा नंबर 1, 4, 5, 6, 7 शामिल हैं। खसरा नंबर 01 बंजर कदीम और आंशिक रूप से जंगल के रूप में दर्ज है। खसरा 05 बारानी अव्वल और खसरा 06/1106 चारानी अव्वल के रूप में दर्ज है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस निर्माण पर कई कानून लागू होते हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम नियोजन अधिनियम 1977, भू-उपयोग परिवर्तन नियम 1998, वन संरक्षण अधिनियम 1980 और EIA अधिसूचना 2006 शामिल हैं। 20 से अधिक कमरों वाले होटल के लिए पर्यावरणीय मंजूरी आवश्यक है। जंगल दर्ज भूमि पर निर्माण के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी भी जरूरी है। लोगों का विरोध और संभावित कानूनी लड़ाई
धर्मशाला के स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस निर्माण से पहाड़ों पर दबाव बढ़ेगा और लैंडस्लाइड का खतरा और ज्यादा होगा। उनका आरोप है कि विभागीय अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि इस मामले में वन कानूनों और भूमि उपयोग नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो मामला सीधे कोर्ट तक पहुंच सकता है। नायब तहसीलदार मोहम्मद यासीन की रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि धर्मशाला की इस होटल परियोजना पर कानूनी और पर्यावरणीय जांच की तलवार लटक सकती है।
