हिमाचल प्रदेश में किन्नर कैलाश यात्रा पर गए एक श्रद्धालु की आज (मंगलवार) मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पहाड़ी से बड़ा पत्थर गिरने से श्रद्धालु की जान गई है। मृतक की पहचान उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी गौरव के तौर पर हुई है। किन्नौर जिला प्रशासन ने भारी बारिश, खराब रास्तों की स्थित को देखते हुए किन्नर कैलाश यात्रा को आज रद्द कर दिया है। यह यात्रा 30 अगस्त तक चलने वाली थी। मगर इसे 11 दिन पहले ही रोकना पड़ा है, क्योंकि प्रदेश में इस बार सामान्य से 17 प्रतिशत ज्यादा बारिश हो चुकी है। इससे सड़क व रास्तों की स्थिति बेहद खराब हो गई है। 5 श्रद्धालुओं की चली गई जान अब तक इस यात्रा के दौरान पांच श्रद्धालुओं की गिरने, पानी में बहने या फिर पहाड़ी से पत्थर गिरने से जान चली गई है। रास्तों की हालात बेहद खतरनाक हो चुकी है। अगले चार-पांच दिन जारी रहेगी बारिश मौसम विभाग ने अगले चार-पांच दिन तक भी बारिश का पूर्वानुमान लगाया है। ऐसे में यात्रा को कंटीन्यू रखना संभव नहीं है। लिहाजा प्रशासन के इस फैसले के बाद किसी को भी किन्नर कैलाश यात्रा पर नहीं भेजा जाएगा। देशभर से किन्रर कैलाश पहुंचते हैं श्रद्धाल बता दें कि किन्नर कैलाश यात्रा पर देशभर से बड़ी संख्या में भगवान भोले के भक्त पहुंचते हैं। इस बार भी भारी बारिश के बावजूद 7253 श्रद्धालु किन्नर कैलाश की यात्रा कर चुके हैं।
मान्यता है कि धरती पर कुल 5 कैलाश हैं। किन्नर कैलाश उनमें से एक है। अन्य 4 में कैलाश मानसरोवर, आदि कैलाश, मणिमहेश कैलाश और श्रीखंड महादेव कैलाश हैं। भगवान शिव और माता पार्वती का माना जाता है निवास किन्नर कैलाश भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध निवास में से एक है। इस शिखर तक पहुंचने का रास्ता बेहद कठिन है। किन्नर कैलाश को भगवान शिव और माता पार्वती का विश्राम स्थल माना जाता है। किन्नौर में रहने वाले किन्नर जनजाति के लोगों को इस पर्वत का नाम किन्नर कैलाश देकर सम्मानित किया गया था।

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