हाई कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी माता-पिता को अपने ही बच्चे के अपहरण के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि दोनों ही माता-पिता बच्चे के समान प्राकृतिक अभिभावक होते हैं। 

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