दिल्ली हाई कोर्ट ने रेप के एक आरोपी को बरी करते हुए अपने एक फैसले में कहा कि DNA से केवल पितृत्व साबित होता है, सहमति का अभाव नहीं। आरोपी को रेप के मामले में 10 साल की सजा हुई थी। 

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