हिमाचल प्रदेश में हमीरपुर जिला के गांव पैरवी से ताल्लुक रखने वाले एक दंपती ने देहदान का संकल्प लिया है। करीब 5 साल पहले सीनियर सेकेंडरी स्कूल महारल से प्रिंसिपल के पद से रिटायर्ड हुए करतार सिंह ढिल्लो और उनकी पत्नी निर्मला ढिल्लो ने दो दिन पहले इस सिलसिले में सारी औपचारिकताएं पूरी करके स्वास्थ्य विभाग को दे दी हैं। समिति अध्यक्ष से मिली प्रेरणा विझड़ी के गांव पैरवी के रहने वाले करतार सिंह का कहना है कि देहदान की यह इच्छा अचानक ही नहीं, बल्कि उन लोगों की प्रेरणा का स्रोत है, जो पहले ही देहदान करने का संकल्प कर चुके हैं। तीन बेटियों और एक बेटे के पिता करतार सिंह का कहना है कि उनके मंडी जिला के गोहर से ताल्लुक रखने वाले उनके कुड़म दंपती ने भी कुछ समय पहले देहदान की घोषणा की थी। इसके अलावा बल्ह बिहाल से ताल्लुक रखने वाले नारायण सेवा समिति के पांच साल तक अध्यक्ष रहे दीनानाथ वर्मा से भी प्रेरणा मिली। दो घटनाओं ने किया मोटिवेट उन्होंने कुछ समय पहले देहदान की जब इच्छा जताई और यह पूछा कि यह प्रक्रिया कहां से मुकम्मल होगी? तो उन्होंने ही दीनानाथ वर्मा का संबंधित फॉर्म भरा। इन्हीं दो प्रेरणादायक घटनाओं ने मुझे भी मोटिवेट करने का काम किया। मानव जीवन जीवों के लिए भी बनाया वे कहते हैं कि मानव जीवन अपने लिए नहीं, बल्कि अपने जीवन के साथ-साथ अन्य जीवों के लिए भी बनाया गया है। जिस व्यक्ति ने जरूरतमंदों की जरूरत को पूरा नहीं किया, प्राणियों को अन्न नहीं खिलाया और बीमार व्यक्ति की सेवा नहीं की, उसका जीवन सार्थक नहीं है। देहदान का मुख्य उद्देश्य तो शरीर को प्रशिक्षु डॉक्टरों को अध्ययन करने के लिए व जो अंग शरीर के किसी और इंसान के काम आ जाएं, तो इससे बड़ा और क्या दान हो सकता है। हमारी आंखों से कोई देख सकेगा दुनिया शरीर को जलाना, दफनाना, राख करना है, जो किसी काम नहीं आता। हमारे जाने के बाद भी हमारी आंखों से कोई देख सके, गुर्दा, लीवर, हड्डियां या और कोई अच्छी हालत का अंग किसी को जीवन में काम आ जाए, तो बेहतर होगा। बेटे और बहू की ली सहमति ढिल्लो का बेटा विशाल ढिल्लो बैंक में मैनेजर है। उनकी बहू जागृति गुप्ता नेरी में साइंटिस्ट हैं, जबकि तीनों बड़ी बेटियां किरण शिमला में लेक्चरर, अनुपमा डीएवी धर्मशाला में लेक्चरर और सीमा ऊना जिले के अंब में टीचर के पद पर कार्यरत हैं। वे बताते हैं कि बेटा विशाल ढिल्लो और बहू जागृति गुप्ता की इसमें सहमति ली गई। वहीं से उन्हें और आत्म बल मिला।

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