हिमाचल हाईकोर्ट में आज तीन निर्दलीय विधायकों की याचिका पर सुनवाई होगी। देहरा से इंडिपेंडेंट MLA होशियार सिंह, नालागढ़ से केएल ठाकुर और हमीरपुर से आशीष शर्मा ने उनके इस्तीफे मंजूर कराने के लिए स्पीकर को निर्देश देने के लिए याचिका दायर कर रखी है। पिछले कल भी यह केस चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव की बैंच में लगा था। मगर इसे आज के लिए टाल दिया गया। स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया की ओर से कोर्ट में आज सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता कपिल सिब्बल वर्चुअली दिल्ली से जुड़ सकते हैं। दरअसल, कोर्ट में विधानसभा स्पीकर को नोटिस जारी कर इंडिपेंडेंट MLA का इस्तीफा स्वीकार नहीं करने को लेकर जवाब मांग रखा है। आज अदालत में स्पीकर के जवाब को ऑन रिकॉर्ड लिया जाएगा। इसके आधार पर अदालत अपना फैसला सुनाएगी। 22 मार्च को दिया था इस्तीफा तीनों निर्दलीय विधायकों ने बीते 22 मार्च को अपने पद से इस्तीफा दिया था। स्पीकर द्वारा इनका इस्तीफा अब तक स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद विधायकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। विधायकों ने कोर्ट से आग्रह किया कि उन्होंने अपनी इच्छा से बिना किसी दबाव के रिजाइन किया है। इसलिए उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाना चाहिए। स्पीकर ने इसलिए जारी किया कारण बताओ नोटिस वहीं स्पीकर ने दो मंत्रियों की शिकायत पर निर्दलीय विधायकों को कारण बताओ नोटिस दिया था, जिसका जवाब बीते 10 अप्रैल को तीनों विधायक स्पीकर को दे चुके हैं। इसमें विधायकों से पूछा गया था कि समय से पहले रिजाइन क्यों किया? क्या आप पर किसी प्रकार का कोई दबाव था। नेगी-रोहित ने की शिकायत राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने स्पीकर के पास शिकायत की, जिसमें इन्होंने शंका जाहिर की कि 5 साल के लिए चुने गए विधायकों ने आखिर 15 महीने में ही रिजाइन क्यों किया? साथ ही शिकायत में कहा गया कि BJP ने इन्हें हेलिकॉप्टर से शिमला पहुंचाया। यही नहीं इस्तीफा देते वक्त भाजपा नेता भी साथ मौजूद रहे। क्या इन पर कोई दबाव था? इनकी शिकायत पर ही स्पीकर ने नोटिस दिया है। इस वजह से स्पीकर ने विधायकों द्वारा नोटिस का जवाब देने से पहले इनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। इस बीच विधायक हाईकोर्ट पहुंच गए। अब हाईकोर्ट इनके इस्तीफे को लेकर फैसला करेगा। निर्दलीय भी दल बदल नहीं कर सकता स्पीकर कुलदीप पठानिया कह चुके हैं कि एंटी डिफेक्शन लॉ के अनुसार, कोई भी चुना हुआ विधायक दल बदल नहीं कर सकता। यहां तक की पांच साल तक इंडिपेंडेंट MLA भी नहीं। यदि ऐसा करता है तो वह एंटी डिफेक्शन लॉ के प्रोविजनल को अट्रैक्ट करता है। 23 मार्च को इन्होंने BJP जॉइन की निर्दलीय विधायकों ने 22 मार्च को इस्तीफा देने के एक दिन बाद यानी 23 मार्च को दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर ली। इस्तीफा स्वीकार करने की मांग को लेकर तीनों विधायक विधानसभा के बाहर धरना भी दे चुके हैं। प्रदेश में पहली बार ऐसा हुआ है जब तीन निर्दलीय विधायकों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया और इसे स्वीकार करने के लिए प्रदर्शन भी किया। अब अदालत का दरवाजा खटखटाया है। राज्यसभा चुनाव से शुरू हुआ विवाद निर्दलीय विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी हर्ष महाजन को वोट दिया था। इससे बहुमत वाली कांग्रेस सरकार चुनाव हार गई। राज्यसभा चुनाव से पहले तक तीनों निर्दलीय विधायक सरकार के साथ एसोशिएट के तौर पर काम कर रहे थे। मगर राज्यसभा चुनाव के बाद इन्होंने विधायकी छोड़कर बीजेपी जॉइन की। हालांकि तीनों विधायक बिना बीजेपी जॉइन किए भी भाजपा को समर्थन दे सकते थे। मगर इन्होंने अपने पदों से इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने के विकल्प को बेहतर माना।