हिमाचल प्रदेश में सेब की पैकिंग के लिए यूनिवर्सल कार्टन (फिक्स) अनिवार्य कर दिया गया है। कृषि विभाग ने इसे लेकर बुधवार को नोटिफिकेशन जारी कर दी है। इसी के साथ पांच दशक से पैकिंग को इस्तेमाल हो रहे टेलिस्कोपिक कार्टन पर प्रतिबंध लग गया है। सेब उत्पादक संघ के बैनर तले बागवानों के लंबे संघर्ष के बाद उनकी सालों पुरानी यह मांग पूरी हुई है। अब बागवान पहले की तरह अपनी मर्जी से पांच से ज्यादा ट्रे प्रति पेटी नहीं भर पाएंगे। पूर्व में कुछ बागवान आढ़तियों व लदानियों के दबाव में प्रति पेटी 8 ट्रे तक सेब भर देते थे और प्रत्येक पेटी का वजन 30 से 40 किलो तक पहुंच जाता था, जबकि दाम उन्हें औसत 20 से 25 किलो की पेटी मान कर दिए जाते थे। सेब की पैकिंग को पैरामीटर तय स्टेक होल्डर से चर्चा के बाद सरकार ने सेब पैकिंग के पैरामीटर तय किए है। यूनिवर्सल कार्टन लागू होने के बाद अब एक्स्ट्रा लार्ज साइज के सेब के प्रति ट्रे 20 दाने भरे जाएंगे और 4 ट्रे में कुल 80 दाने होंगे। इसका वजन 20 किलो बनेगा। इसी तरह लार्ज साइज के सेब के प्रति ट्रे 20 दाने भरे जाएंगे, लेकिन इसमें पांच ट्रे प्रति पेटी होगी। इसका वजन भी 20 किलो ही होगा। मीडियम साइज के पेटी में 125 दाने सेब भरे जाएंगे मीडियम साइज सेब के प्रति ट्रे 25 दाने और 5 ट्रे में 125 दाने भरे जाएंगे। इसका वजन 20 किलो 125 ग्राम के आसपास होगा। स्मॉल साइज सेब के 30 दाने प्रति ट्रे और 5 ट्रे में 150 सेब के दाने भरे जाएंगे। इसका वजन 20.025 किलोग्राम के आसपास होगा। ऐक्स्ट्रा स्मॉल सेब के प्रति ट्रे 35 दाने और 5 ट्रे में 175 दाने सेब भरे जाएंगे। इसका वजन 20.075 किलोग्राम होगा। हिमाचल के बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने विधानसभा के बीते साल मानसून सत्र में ही यूनिवर्सल कार्टन अनिवार्य करने का ऐलान कर दिया था। सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद अब जाकर नोटिफिकेशन जारी कर दी गई है। टेलीस्कोपिक से कैसे अलग यूनिवर्सल कार्टन दरअसल, यूनिवर्सल कार्टन में सिर्फ 20 किलो सेब ही भरा जा सकता है, जबकि टेलिस्कोपिक में बागवान 25 से 40 किलो तक सेब भरने लगे थे। बागवानों को दाम औसत 20 से 25 किलो के हिसाब से दिए जाते हैं। इस तरह प्रति पेटी बागवान 5 से 15 किलो अतिरिक्त सेब दे रहे थे। इस लिहाज से बागवानों को प्रति पेटी कई बार 200 से 700 रुपए तक का नुकसान उठाना पड़ता है। इसका फायदा लदानी और उठा जाते हैं, जो हिमाचल में खरीदे गए सेब को देश के बाजारों में किलो के हिसाब से बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। यह है सेब पैकिंग का इंटरनेशनल स्टैंडर्ड दुनियाभर में सेब 4 लेयर में भरा जाता है। यह सेब पैकिंग का अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड है। दुनिया के किसी भी मुल्क से भारत में सेब आयात किया जाता है तो भी किलो के हिसाब से खरीदा जाता है, लेकिन हिमाचल में बागवान टेलिस्कोपिक कार्टन में 6 से 8 तह में सेब भर रहे हैं। कुछ बागवान ऐसा कमीशन एजेंट के दबाव में आकर तो कुछ सबसे महंगा सेब बिकने की चाहत में कर रहे हैं। वीरभद्र सरकार 2 बार लाई थी विधेयक पूर्व वीरभद्र सिंह सरकार ने भी यूनिवर्सल कार्टन को लेकर 2 बार विधेयक पेश किया, लेकिन बिना तैयारियों के लाया गया विधेयक बागवानों के विरोध के बाद वापस लेना पड़ा। उस दौरान यूनिवर्सल कार्टन तो अनिवार्य कर दिया गया, मगर बाजार में इसकी उपलब्धता नहीं कराई गई। कार्टन बनाने वाली कंपनियों से पहले संपर्क नहीं साधा गया। हालांकि यूनिवर्सल कार्टन इस्तेमाल न करने वाले बागवानों को पैनल्टी लगाने इत्यादि का प्रावधान अध्यादेश में कर लिया गया था। तब यूनिवर्सल कार्टन के साइज इत्यादि तैयार करने पर पूर्व सरकार ने तकरीबन 11 लाख रुपए खर्च किए थे। यह कहना है किसान नेताओं का? कोटगढ़ हॉर्टीकल्चर एंड एन्वायर्नमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष एवं प्रगतिशील बागवान हरिचंद रोच ने बताया कि प्रदेश में फिक्स कार्टन (यूनिवर्सल) होना चाहिए। टेलिस्कोपिक कार्टन तो लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट को भी वॉयलेट कर रहा है। ओवर ग्रेड में सेब बेचने पर पूर्णत: रोक होनी चाहिए। यूनिवर्सल कार्टन लागू होने से बागवानों को फायदा होगा। यूनिवर्सल कार्टन पर रहेगा फोकस हिमाचल के बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि आज यूनिवर्सल कार्टन को लेकर आज नोटिफिकेश कर दी गई है। अब बागवान सरकार द्वारा तय स्टैंडर्ड के तहत ही सेब भर सकेंगे। यह निर्णय बागवानों से चर्चा के बाद लिया गया है। हिमाचल सेब उत्पादक संघ के प्रदेशाध्यक्ष सोहन ठाकुर ने बताया कि बागवानों ने यूनिवर्सल कार्टन के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। इसके लागू होने से बागवानों को फायदा मिलेगा।