भारतीय जनता पार्टी ने कांगड़ा सीट से डॉ. राजीव भारद्वाज को टिकट देकर ब्राह्मण कार्ड खेला है। शांता कुमार के राजनीति से सन्यास लेने के बाद कांगड़ा में BJP को ब्राह्मण नेता की तलाश में थी। पार्टी ने यहां से OBC नेता एवं सीटिंग MP किशन कपूर का टिकट काटकर राजीव भारद्वाज पर भरोसा जताया है। राजीव भारद्वाज, शांता कुमार के भी करीबी रहे हैं। उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और प्रदेश भाजपा नेताओं से भी अच्छे संबंध रहे हैं। डॉ. भारद्वाज बचपन से ही स्वयं सेवक संघ से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी की डिग्री ली है। राजीव भारद्वाज ने 1989 में भारतीय जनता पार्टी जॉइन की। तीसरी बार वह भाजपा के उपाध्यक्ष बने हैं। भाजपा की सरकारों में वह कई बार विभिन्न पदों पर तैनात रहे। प्रेम कुमार धूमल की सरकार में 2008 से 12 तक हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) में उपाध्यक्ष रहे, जबकि पूर्व जयराम सरकार में कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के चेयरमैन बने। राजीव भारद्वाज को इसलिए दिया गया टिकट राजीव भारद्वाज को टिकट मिलने की दो बड़ी वजह मानी जा रही है। पहली हिमाचल में सियासी उठापटक और दूसरा जातीय समीकरण। हिमाचल सरकार पर संकट से पहले कांगड़ा सीट से विपिन सिंह परमार को चुनाव लड़ाए जाने की चर्चाएं थी। अब 9 विधायकों के BJP जॉइन करने के बाद विधानसभा में कभी भी संख्याबल की नौबत आ सकती है। इसलिए BJP ने सीटिंग MLA को चुनाव नहीं लड़ाने का फैसला लिया है। 23% ब्राह्मण आबादी साधने को फैसला वहीं, 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कांगड़ा संसदीय क्षेत्र की एक भी सीट पर ब्राह्मण नेता नहीं उतारा था। तब भाजपा ने 11 सीटों पर राजपूत और अन्य 6 सीटों पर OBC व दूसरी कम्युनिटी से कैंडिडेट दिए थे। तब भाजपा 17 में 11 सीटों पर चुनाव हार गई थी। BJP नेता संजय भारद्वाज के अनुसार, प्रदेश में 23 फीसदी ब्राह्मण आबादी है। इसलिए भी भाजपा ने राजीव भारद्वाज पर दांव खेला है। कांगड़ा के दो दिग्गज ब्राह्मण नेता बाहर कांगड़ा हल्के से शांता कुमार और राजन सुशांत भाजपा में दो बड़े ब्राह्मण नेता रहे हैं। शांता राजनीति से रिटायर हो चुके हैं, जबकि राजन सुशांत BJP से बागी हो गए है। ऐसे में BJP को नए ब्राह्मण नेता की तलाश थी। चर्चा यह भी थी कि हाल में BJP में शामिल धर्मशाला के पूर्व विधायक सुधीर शर्मा को भी ब्राह्मण नेता के तौर पर मैदान में उतारा जा सकता है, लेकिन पार्टी हाईकमान ने सुधीर को आम चुनाव में न लड़ाने का निर्णय लिया और 58 साल से राजीव भारद्वाज को टिकट दिया।

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