इंटरनेशनल और नेशनल लेवल पर देश व हिमाचल का नाम रोशन करने वाले 419 खिलाड़ियों को राज्य सरकार आज शिमला में सम्मानित करेगी। इनकी उपलब्धियों के पीछे परिवारों का भी लंबा संघर्ष रहा है। किसी के पिता खेती के साथ दिहाड़ी मजदूरी करते रहे तो किसी के परिवार का खर्च टैक्सी चलाकर चलता था। चंबा की एक खिलाड़ी की मां ने दूध बेचकर परिवार पाला और बेटी के खेल के सपने को पूरा करने में साथ दिया। आर्थिक मुश्किलों के बावजूद इन परिवारों ने बच्चों को खेल में आगे बढ़ने से नहीं रोका। अब इन खिलाड़ियों को मिलने वाली नकद पुरस्कार राशि से उनकी आर्थिक चिंताएं कुछ कम होंगी। कोई इस पैसे से माता-पिता के लिए घर बनाना चाहता है तो किसी को अपना खेल जारी रखने के लिए आर्थिक सहारा मिलेगा। ‘भास्कर एक्सप्लेनर’ में पढ़िए एशियन गेम्स में मेडल जीतने वाले हिमाचल के तीन खिलाड़ियों के संघर्ष और उनके सपनों की कहानी। 1. माता-पिता के लिए नया घर बनाने का सपना: भावना महिला कबड्डी टीम में गोल्ड मेडल जीतने वाली भावना ठाकुर को एक करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि मिलेगी। भावना इस पैसे से अपने माता-पिता के लिए नया घर बनाना चाहती हैं। चार भाई-बहनों में सबसे छोटी भावना के पिता छोटे किसान हैं। परिवार की आमदनी बढ़ाने के लिए वे दिहाड़ी मजदूरी भी करते रहे हैं। भावना बताती हैं कि परिवार में पैसों की हमेशा कमी रहती थी, लेकिन खेल के लिए जब भी उन्हें जरूरत पड़ी, माता-पिता ने किसी तरह इंतजाम किया। माता-पिता ने सीमित संसाधनों के बावजूद उनका साथ नहीं छोड़ा। अब वह पुरस्कार राशि से उनके लिए कुछ करना चाहती हैं। 2. मां ने दूध बेचकर पाला: सीमा चंबा के दूरदराज गांव की रहने वाली सीमा कुमारी ने 10 हजार मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता है। सीमा के बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद मां ने दूध बेचकर परिवार का पालन-पोषण किया। सीमा का चयन जब धर्मशाला स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के हॉस्टल के लिए हुआ तो कई लोगों ने उनकी मां को बेटी को वहां भेजने से रोकने की कोशिश की। लेकिन मां ने किसी की बात नहीं मानी और बेटी के खेल के सपने को पूरा करने में उसका साथ दिया। सीमा का कहना है कि मां के सहयोग के बिना वह इस मुकाम तक नहीं पहुंच सकती थीं। उनके मुताबिक, मिलने वाली पुरस्कार राशि उन्हें और साथी खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करेगी। इससे खेल में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी। 3. आर्थिक चिंता होगी कम, खेल पर लगा सकेंगे पूरा ध्यान: सावन मंडी के सावन बरवाल ने एशियन गेम्स की मैराथन में सिल्वर मेडल जीता है। उनका परिवार भी आर्थिक चुनौतियों से जूझता रहा है। उनके पिता दिल्ली में निजी गाड़ी चलाते हैं। खेल की तैयारी और अलग-अलग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के दौरान सावन को भी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। सावन का कहना है कि पुरस्कार राशि मिलने से आर्थिक चिंता कम होगी। अब वह पैसों की फिक्र किए बिना अपने खेल पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे और बेहतर प्रदर्शन की तैयारी कर सकेंगे। राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेताओं को भी मिलेगा सम्मान राज्य सरकार एशियन गेम्स के पदक विजेताओं के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को भी नकद पुरस्कार देगी। समारोह में कुल करीब 18 करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि वितरित की जाएगी। एक जरूरी फैक्ट चेक: मूल अंग्रेजी खबर में भावना, सीमा और सावन के व्यक्तिगत संघर्षों का जिक्र है, लेकिन उसमें 419 खिलाड़ियों और 18 करोड़ रुपए का आंकड़ा नहीं है। ये आंकड़े आपके अलग स्रोत से हैं। प्रकाशन से पहले पुरस्कार सूची और राशि का सरकारी आदेश से मिलान जरूर कर लें। इसी तरह भावना को एक करोड़ रुपए मिलने की पुष्टि भी पुरस्कार सूची से कर लें। पुरस्कार राशि में 150 से 300% तक बढ़ाई: गोमा खेल मंत्री यादवेंद्र गोमा ने बताया कि नई स्पोर्ट्स पॉलिसी के तहत खिलाड़ियों की पुरस्कार राशि में 150 से 300 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशों पर चार साल में दूसरी बार खिलाड़ियों के सम्मान में इस तरह का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। मंडी जिला के सबसे ज्यादा खिलाड़ी सम्मानित होंगे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होने वाले खिलाड़ियों में मंडी जिला सबसे आगे है। यहां के 99 खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा शिमला के 54, सोलन के 49, बिलासपुर के 37, कांगड़ा के 28, हमीरपुर के 24 और ऊना के 19 खिलाड़ी शामिल हैं। इसी तरह कुल्लू और सिरमौर के 18-18, किन्नौर के 15 और चंबा जिले के 7 खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा।

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