कांगड़ा के गगल एयरपोर्ट के आसपास जमीन के संदिग्ध सौदों की जांच में विजिलेंस को राजस्व रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ियां मिली हैं। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, धर्मशाला ने एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की है। जांच का मुख्य बिंदु 1989 का एक कथित राजस्व आदेश है। इसी के आधार पर अब्दुल रहमान का नाम गैर-मौरूसी काश्तकार के रूप में दर्ज हुआ और बाद में उसे जमीन का मालिकाना हक मिला। लेकिन जांच में इस आदेश की मूल कॉपी संबंधित राजस्व दफ्तरों में नहीं मिली। 1989 के दुरुस्ती गिरदावरी रजिस्टर और 1981-82 के पुराने रिकॉर्ड में भी अब्दुल रहमान की काश्तकारी की पुष्टि नहीं हुई। अब इस जमीन के मालिकाना हक से लेकर परिवार के सदस्यों के नाम पर हुई खरीद-बिक्री तक की जांच होगी। रहमान के बेटे गुलाम मेहीदीन मलिक के नाम पर भी करीब 64 कनाल 6 मरले जमीन खरीदने का विवरण मिला है। एसआईटी ने जमीन खरीदने में इस्तेमाल किए गए कृषक प्रमाणपत्रों की वैधता पर भी जांच की जरूरत बताई है। बाद में जमीन बेचने और वर्ष 2025-26 में हुए कुछ हस्तांतरण संबंधी सौदे भी जांच के दायरे में हैं। धोखाधड़ी और जालसाजी की आशंका
एफआईआर में गुलाम मेहीदीन मलिक के अलावा अज्ञात निजी व्यक्तियों और सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होगी। भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एसआई चमन लाल को सौंपी गई है।