हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के उपमंडल अंब में एक सदी पुरानी ऐतिहासिक रामलीला परंपरा में इस वर्ष बड़ा बदलाव देखने को मिला है। युवाओं की बदलती रुचि और पालकी उठाने वाले लोगों की कमी के कारण वर्षों पुरानी परंपरा को बदलते हुए इस बार भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के स्वरूपों को पालकी के बजाय विशेष रूप से तैयार करवाए गए भव्य रथ पर सवार करके शोभायात्रा निकाली गई। 16 लोग कंधों पर उठाते थे पालकी अंब की प्रसिद्ध रामलीला का इतिहास लगभग 100 वर्ष पुराना है। पुरानी परंपरा के अनुसार, भगवान के स्वरूपों को एक भव्य पालकी (सिंहासन) पर बैठाकर देवी मंदिर से रामलीला मैदान तक लाया जाता था। इस भारी-भरकम पालकी को कंधों पर उठाने के लिए लगभग 16 सेवादारों की आवश्यकता होती थी, जो इस शोभायात्रा का सबसे मुख्य और खास आकर्षण हुआ करता था। नई पीढ़ी की बेरुखी से बदला तरीका समय बीतने के साथ पालकी उठाने वाले अधिकांश पुराने सेवादार अब बुजुर्ग हो चुके हैं। वहीं, नई पीढ़ी के युवाओं में पालकी उठाने को लेकर रुचि न होने के कारण इस बार कमेटी को पर्याप्त लोग नहीं मिल पाए। परंपरा को टूटने से बचाने और आयोजन को निर्बाध जारी रखने के लिए रामलीला कमेटी को यह वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ा। पंजाब से मंगवाया गया विशेष रथ रामलीला कमेटी के सदस्यों—राजेश गौतम, राजेश ठाकुर, राघव ठाकुर और आशु राणा ने बताया कि परंपरा को कायम रखने के लिए पंजाब से एक सुंदर रथ तैयार करवाया गया। इस बार भगवान के स्वरूप इसी रथ पर विराजमान होकर देवी मंदिर से रामलीला मैदान पहुंचे, जिसे एक चालक द्वारा संचालित किया गया। कमेटी पदाधिकारियों का कहना है कि तरीका भले ही बदला हो, लेकिन देवी मंदिर से रामलीला मैदान तक शोभायात्रा निकालने की ऐतिहासिक धार्मिक परंपरा आगे भी पूरी श्रद्धा और धूमधाम से जारी रहेगी।