आने वाले कल के लीडर की पहचान इस बात से नहीं होनी चाहिए कि कौन कितनी ज़ोर से चिल्लाया। पहचान तो उनकी बनेगी जो ध्यान से सुनना और ईमानदारी से समझना सीखेंगे। हमें बच्चों को अपने अधिकारों के साथ-साथ उनके कर्तव्यों के बारे में भी बताना होगा। ये समझाना होगा कि शिष्टाचार का मतलब कमज़ोरी नहीं होता।