शिमला जिले के खनेरी अस्पताल में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड सेवाएं ठप्प पड़ी हैं, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह अस्पताल चार जिलों के लोगों के लिए एकमात्र बड़ा स्वास्थ्य केंद्र है, जहां रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 1000 मरीजों की ओपीडी रहती है। इन बुनियादी जांच सुविधाओं के बंद होने से मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गरीब और दूरदराज के मरीजों को निजी क्लीनिकों में दोगुना से भी अधिक दाम पर टेस्ट करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड के लिए 800 से 1500 रुपये और एक्स-रे के लिए 300 रुपये से अधिक चुकाने पड़ रहे हैं, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी अल्ट्रासाउंड बंद होने से गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी हो रही है, जिन्हें गर्भावस्था के दौरान कई बार यह टेस्ट करवाना पड़ता है। अस्पताल में यह सुविधा निशुल्क मिलती थी, लेकिन अब उन्हें निजी लैबों में महंगे शुल्क का भुगतान करना पड़ रहा है। अस्पताल में एक्स-रे प्लांट में तकनीकी खराबी बताई जा रही है, जबकि अल्ट्रासाउंड मशीन 20 वर्ष पुरानी है और खराब पड़ी है। पूर्व प्रत्याशी कौल सिंह ने इस स्थिति पर चिंता जताई पूर्व हिमकोफेड चेयरमैन एवं भाजपा के पूर्व प्रत्याशी कौल सिंह ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जब से प्रदेश में कांग्रेस सरकार आई है, तब से खनेरी अस्पताल की हालत खराब हो गई है। उन्होंने प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से जल्द अस्पताल में अवरुद्ध सेवाओं को बहाल करने की मांग की है। कौल सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इस मामले में जल्द संज्ञान नहीं लिया, तो भाजपा जनता के हित में आंदोलन करने को बाध्य होगी।

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