हिमाचल प्रदेश में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राज्य में 20 अप्रैल के बाद कभी भी चुनावों की आधिकारिक घोषणा हो सकती है। सूत्रों के अनुसार- पंचायत चुनाव तीन चरणों में करवाए जा सकते है, जबकि जबकि नगर निकाय चुनाव एक ही हो सकते है। इन चुनावों की घोषणा से पहले स्टेट इलेक्शन कमिश्नर अनिल खाची आज जिला स्तर पर चुनाव की तैयारियों का जायजा लेंगे। इसके तहत वे सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारी (डीसी) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक करेंगे। इस अहम बैठक में चुनाव से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक- डीसी को चुनावी ड्यूटी के लिए कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करने, वोटर लिस्ट को अंतिम रूप देने, चुनाव सामग्री की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए जाएंगे। वहीं जिलों के एसपी को मतदान के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने, संवेदनशील और अति संवेदनशील पोलिंग बूथ के हिसाब से जवानों की तैनाती, स्ट्रांग रूम के बाहर सुरक्षा इत्यादि को लेकर निर्देश दिए जाएंगे, ताकि चुनाव शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हों। 3757 पंचायतों और 73 नगर निकायों में चुनाव प्रस्तावित राज्य में इस बार कुल 3757 पंचायतों और 73 नगर निकायों में चुनाव प्रस्तावित हैं, जिसके चलते प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां जरूरी हो गई हैं। इनके लिए लगभग 55 हजार कर्मचारियों की चुनाव में ड्यूटी लगाई जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने 31 मई से पहले चुनाव कराने के निर्देश दे रखे सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को 31 मई से पहले चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। इसी समयसीमा को ध्यान में रखते हुए आयोग तेजी से तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। इलेक्शन कमीशन द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद पूरे राज्य में आचार संहिता लागू हो जाएगी। चुनावों की संभावित घोषणा को देखते हुए राजनीतिक दल भी सक्रिय हो गए है। बीजेपी पहले ही इन चुनाव के लिए नेताओं को जिम्मेदारी सौंप चुकी है। वहीं कांग्रेस ने भी आज प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मीटिंग बुलाई है। इसमें पंचायत और नगर निकाय चुनाव की रणनीति बनाई जाएगी। कांग्रेस-भाजपा का नगर निगम चुनाव पर फोकस कांग्रेस-भाजपा का ज्यादा फोकस नगर निगम चुनाव पर है, क्योंकि नगर निगम इलेक्शन पार्टी सिंबल पर होते है। वहीं नगर परिषद, नगर पंचायत और पंचयात चुनाव बिना पार्टी सिंबल पर होते है। इस वजह से सत्तारूढ़ कांग्रेस ही नगर निगम चुनाव में कड़ी परीक्षा होने जा रही है।

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