हिमाचल प्रदेश में पंचायत समिति सदस्य (BDC) और जिला परिषद (जिप) के चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं के लिए राहत की खबर है। यदि किसी दावेदार का वार्ड आरक्षित हो जाता है, तो वह दूसरी जगह से भी चुनाव लड़ सकता है। नियमों के अनुसार, जिला परिषद का चुनाव जिले के किसी भी जिप वार्ड से लड़ा जा सकता है, जबकि BDC का चुनाव संबंधित ब्लॉक के किसी भी वार्ड से लड़ने का कानून में प्रावधान है। यानी आरक्षण के बाद सीट बदलने का विकल्प उम्मीदवारों के पास खुला रहता है। प्रधान-उपप्रधान के लिए नहीं है यह छूट हालांकि, यह सुविधा सभी पदों के लिए लागू नहीं है। पंचायतीराज एक्ट के तहत प्रधान, उप-प्रधान और वार्ड मेंबर अपनी पंचायत से बाहर जाकर चुनाव नहीं लड़ सकते। यह प्रतिबंध इन पदों को स्थानीय स्तर तक सीमित रखता है, जबकि BDC और जिप में क्षेत्रीय लचीलापन दिया गया है। दूसरी जगह से चुनाव लड़ने के लिए जरूरी शर्तें दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार को दो अहम शर्तें पूरी करनी होंगी। पहला: उम्मीदवार का नाम वोटर लिस्ट में होना चाहिए। दूसरा: जिस वार्ड से चुनाव लड़ना है, वहां नामांकन के समय एक प्रस्तावक (प्रोपोजर) होना अनिवार्य है। इन दोनों शर्तों के पूरा होने पर ही उम्मीदवार दूसरे क्षेत्र से चुनाव लड़ सकता है। आरक्षण रोस्टर से बदले सियासी समीकरण पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर जारी होने के बाद प्रदेश में सियासी गणित पूरी तरह बदल गया है। महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण के कारण कुल मिलाकर करीब 55 फीसदी सीटें रिजर्व हो गई हैं, जबकि पुरुषों और ओपन कैटेगरी के लिए लगभग 45 फीसदी सीटें ही बची हैं। इससे कई संभावित उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने के समीकरण बिगड़ गए हैं। “प्रॉक्सी” उम्मीदवारों का बढ़ता ट्रेंड आरक्षण के चलते कई जगह दिलचस्प ट्रेंड भी देखने को मिल रहा है। जिन पुरुष उम्मीदवारों की सीट महिला के लिए आरक्षित हो गई है, वे अब अपनी पत्नी या परिवार की महिला सदस्य को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। इसके अलावा, कई दावेदार अब दूसरी सीटों से चुनाव लड़ने की रणनीति बना रहे हैं। शहरी निकाय के मतदाता नहीं लड़ सकते चुनाव पंचायतीराज एक्ट के मुताबिक, शहरी निकाय (नगर निगम/नगर परिषद) के मतदाता जिला परिषद का चुनाव नहीं लड़ सकते। इसी तरह, किसी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले नगर निकाय का मतदाता BDC चुनाव के लिए भी अयोग्य होता है। 31 मई से पहले होंगे चुनाव प्रदेश की 3755 पंचायतों में सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार- 31 मई से पहले चुनाव कराए जाने हैं। इसके लिए 7 अप्रैल को सभी जिलों के उपायुक्तों ने आरक्षण रोस्टर जारी कर दिया है। इसके बाद से ही प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालांकि, आरक्षण के चलते कई नेताओं के चुनावी समीकरण बिगड़ गए हैं, लेकिन BDC और जिप के लिए दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने का विकल्प उनके लिए नई संभावनाएं भी खोल रहा है।