हिमाचल प्रदेश को वैश्विक पर्यटन राजधानी बनाने की दिशा में कांगड़ा (गग्गल) एयरपोर्ट विस्तार परियोजना महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। प्रदेश सरकार ने इस परियोजना के लिए 500 करोड़ रुपए की नई किस्त जारी की है। इसका उद्देश्य भूमि अधिग्रहण और विस्थापितों के पुनर्वास कार्य में वित्तीय बाधाओं को दूर करना है। कांगड़ा के उपायुक्त हेमराज बैरवा ने बताया कि अब तक प्रभावित परिवारों को 1500 करोड़ रुपए से अधिक का मुआवजा सीधे उनके खातों में दिया जा चुका है। कुल अनुमानित मुआवजा 2500 करोड़ रुपए तक पहुंचने की संभावना है। प्रशासन ने मुआवजे के भुगतान और भूमि हस्तांतरण के लिए 31 मार्च 2026 की समय सीमा तय की है। कानूनी प्रक्रिया के तहत सेक्शन-19 के नोटिस जारी हो चुके हैं। जल्द ही यह भूमि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के नाम पर म्यूटेट कर दी जाएगी, जिसके बाद एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे का निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। एयरपोर्ट का रन-वे बढ़कर 3010 मीटर होगा : डीसी वर्तमान में गग्गल एयरपोर्ट का रन-वे 1376 मीटर लंबा है, जो केवल 70 से 80 सीटों वाले एटीआर-72 जैसे छोटे विमानों के लिए उपयुक्त है। इस सीमित क्षमता के कारण उड़ानें महंगी होती हैं और खराब मौसम में अक्सर रद्द करनी पड़ती हैं। विस्तार के बाद एयरपोर्ट का रन-वे बढ़कर 3010 मीटर हो जाएगा। इससे एयरबस A320 और बोइंग 737 जैसे 180 से अधिक सीटों वाले बड़े विमान यहां आसानी से उतर सकेंगे। इस विस्तार से दिल्ली के साथ-साथ मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे प्रमुख महानगरों से कांगड़ा की सीधी हवाई कनेक्टिविटी संभव होगी। इससे क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। रात में भी संभव होगी लैंडिंग, बदलेगी पर्यटन की तस्वीर डीसी ने बताया कि रन-वे विस्तार के साथ-साथ यहां अत्याधुनिक नेविगेशन और लैंडिंग सिस्टम भी स्थापित किए जाएंगे। इसकी मदद से खराब मौसम, भारी बारिश या घने कोहरे के बीच भी विमानों की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की जा सकेगी। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ‘नाइट लैंडिंग’ की सुविधा के रूप में आएगा, जिससे रात के समय भी हवाई संचालन संभव होगा। कांगड़ा को पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करने के सरकार के विजन के लिए यह एयरपोर्ट एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। जब बड़े विमानों की आवाजाही शुरू होगी, तो प्रतिस्पर्धा बढ़ने से आम यात्रियों के लिए हवाई किराया भी कम होगा, जिसका सीधा लाभ स्थानीय होटल व्यवसाय और पर्यटन से जुड़े हजारों युवाओं को मिलेगा।

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