हिमाचल प्रदेश के पहले कॉमेडियन प्रिंस गर्ग का मंच से हटने का फैसला किसी निजी मजबूरी का नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था, सांस्कृतिक नीति और कलाकार विरोधी सिस्टम के खिलाफ खुला विद्रोह है। देहरा में मीडिया से बातचीत में प्रिंस गर्ग ने बेहद तीखे शब्दों में सरकार और आयोजन तंत्र पर हमला बोलते हुए कहा कि यह संन्यास नहीं, अपमान और उपेक्षा के खिलाफ अंतिम चेतावनी है। उन्होंने कहा कि आज हालात ऐसे हो चुके हैं कि कार्यक्रम प्रतिभा से नहीं, पहचान, सिफारिश और पहुंच से मिलते हैं। सोशल मीडिया पर व्यूज जुटाने वालों को सिर-माथे बैठाया जा रहा है, जबकि वर्षों से मंच पर पसीना बहाने वाले कलाकारों को दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर किया जा रहा है। सोशल मीडिया के व्यूज और असली व्यूज में जमीन-आसमान का अंतर प्रिंस गर्ग ने दो टूक कहा कि सोशल मीडिया के व्यूज और असली व्यूज में जमीन-आसमान का अंतर है। किसी वीडियो के मिलियन व्यूज होना महान कलाकार होने की गारंटी नहीं, जबकि असली कलाकार चुपचाप मेहनत करता है और मंच पर अपनी कला से पहचान बनाता है। दुर्भाग्य यह है कि आज नकली चमक को असली हुनर से ऊपर रखा जा रहा है। उन्होंने सरकार पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि प्रदेश का पैसा बाहरी कलाकारों पर लुटाया जा रहा है और हिमाचल के कलाकारों को जानबूझकर हाशिये पर धकेला जा रहा है। यह न केवल स्थानीय प्रतिभा का अपमान है, बल्कि हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान पर भी हमला है। सरकारी सिस्टम ने कलाकार को मजबूर किया : प्रिंस गर्ग 20 वर्षों के संघर्ष को याद करते हुए प्रिंस गर्ग भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि जिस बच्चे को मंच पर मोमेंटो न मिलने पर मां की गोद में रोना पड़ा, वही बच्चा प्रदेश का पहला कॉमेडियन बना। लेकिन आज उसी कलाकार को सिस्टम ने इतना मजबूर कर दिया कि उसे मंच से उतरने का ऐलान करना पड़ा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि हालात नहीं बदले, तो आने वाले समय में और भी कई हिमाचली कलाकार ऐसे कड़े फैसले लेने को मजबूर होंगे। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि केवल कला के भरोसे न रहें, बैकअप जरूर रखें, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में सम्मान और रोजगार दोनों अनिश्चित हैं। प्रिंस गर्ग का यह फैसला केवल एक कलाकार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल के कलाकार समाज की सिसकती आवाज बनकर सामने आया है। यहां देखें प्रिंस गर्ग द्वारा सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट

Spread the love