हिमाचल सरकार ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने पर आज सर्वदलीय (ऑल पार्टी) मीटिंग बुलाई है। इसमें RDG के कारण उपजे वित्तीय हालात को लेकर चर्चा की जाएगी, क्योंकि 16वें वित्त आयोग ने RDG बंद करने की केंद्र सरकार से सिफारिश कर दी है। केंद्र ने भी इन सिफारिशों को मान लिया है। RDG बंद होना हिमाचल के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि RDG हिमाचल के कुल बजट का लगभग 13 फीसदी हिस्सा है। पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां आय के दूसरे साधन नहीं है। खासकर, GST लागू होने के बाद राज्य सरकार टैक्स भी नहीं लगा पा रही है। इससे हिमाचल में आमदन्नी अठन्नी और खर्चा रुपया वाली स्थिति लंबे समय से बनी हुई है। यही वजह है कि हिमाचल सरकार का वित्त पूरी तरह केंद्र पर निर्भर रहता है। साल 2018 से 2022 के बीच पांच सालों में हिमाचल को RDG के तौर पर लगभग 54 हजार करोड़ रुपए मिले। अगले पांच सालों के दौरान भी राज्य सरकार को 45 हजार करोड़ से 50 हजार करोड़ मिलने की उम्मीद थी। मगर अब यह नहीं मिल पाएगा। RDG बंद से वित्तीय संकट गहराया इससे राज्य सरकार के सामने गंभीर वित्तीय संकट वाली स्थिति पैदा हो गई है, क्योंकि राज्य पर पहले ही 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्च चढ़ चुका है। फाइनेंस सेक्रेटरी देवेश कुमार के मुताबिक- आगामी वित्तीय वर्ष में यदि सरकार सारी सब्सिडी बंद करनी और विकास कार्य पर खर्च जीरो कर देती है तो भी 48 हजार करोड़ रुपए खर्च होने का पूर्वानुमान है, जबकि राज्य सरकार को आगामी वित्त वर्ष में विभिन्न संसाधनों से 42 हजार करोड़ रुपए की होगी। BJP के रुख पर सबकी नजरें इस स्थिति से निपटने को सरकार ने सर्वदलीय मीटिंग बुलाई है। अब सबकी नजरें भारतीय जनता पार्टी के रुख पर रहेगी। BJP इस मीटिंग में आती है, क्योंकि बीते रविवार को भी BJP सर्वदलीय मीटिंग में शामिल नहीं हुई थी। आज फिर से बुलाया गया है। RDG के मसले पर प्रदेशवासियों की नजरें BJP के रुख पर टिकी हुई है, क्योंकि RDG बंद करने का फैसला केंद्र की भाजपा सरकार का है। सीएम का सभी राजनीतिक दलों से आग्रह वहीं सीएम सुक्खू ने सभी राजनीतिक दलों से सर्वदीलय मीटिंग में शामिल होने की अपील की है, ताकि प्रदेश को गंभीर वित्तीय संकट से उबारा जा सके। इसमें आय के संसाधन बढ़ाने को लेकर भी चर्चा होगी। सर्वदलीय मीटिंग के बाद केंद्र के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखने का फैसला होगा।