शिमला जिले में आपराधिक मामलों के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का एक गंभीर मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बालूगंज पुलिस थाने में 71 गंभीर आपराधिक मामलों की फाइलें सालों तक दबाकर रखी गईं। इन मामलों के चालान तय समय सीमा में कोर्ट में पेश नहीं किए गए, जिसके चलते अधिकांश मामलों को कोर्ट ने देरी के कारण खारिज कर दिया। इन गंभीर मामलों में NDPS (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस), एट्रोसिटी (अत्याचार निवारण अधिनियम) और मारपीट से संबंधित शिकायतें शामिल थीं। जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों को कई मामलों की फाइलें एक बक्से में मिलीं, जबकि पुलिस ने दावा किया था कि उन्हें कोर्ट में भेज दिया गया है। सरकारी कर्मचारी ने दी थी शिकायत यह मामला पहली बार 2021 में एक सरकारी कर्मचारी की शिकायत के माध्यम से सामने आया था, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। साल 2023 में, जब यह मामला SP के संज्ञान में आया, तो एक विभागीय कमेटी गठित कर जांच शुरू की गई। कोर्ट में फाइलें भेजने का दावा किया जांच में दर्जनों आपराधिक मामलों में बड़ी लापरवाही उजागर हुई। पुलिस के बड़े अधिकारी भी यह देखकर हैरान थे कि जिन मामलों को कोर्ट में भेजने का दावा किया गया था, वे वहां पहुंचे ही नहीं थे। अब पुलिस इसकी गहनता से जांच कर रही है कि इन आपराधिक मामलों के रिकॉर्ड को सालों तक किसने और क्यों दबाया था। पुलिस अधिकारियों की जांच की जा रही इसके साथ ही, तत्कालीन जांच अधिकारियों और अन्य पुलिस अधिकारियों की नीयत और भूमिका को लेकर भी गहनता से पड़ताल की जा रही है। हालांकि, जांच शुरू होने के बाद पुलिस ने इन मामलों में आगे की कार्रवाई करते हुए संबंधित कोर्ट में चालान पेश किए। लेकिन कोर्ट ने इन मामलों में सालों की देरी का कोई ठोस कारण न होने पर नाराजगी जताते हुए ज्यादातर चालानों को नकार दिया।

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