हिमाचल प्रदेश में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल रविवार को तीसरे दिन भी जारी रही। आईजीएमसी (IGMC) शिमला में मरीज से मारपीट की घटना के बाद बर्खास्त किए गए डॉक्टर राघव निरुला की बहाली की मांग पर डॉक्टर अड़े हुए हैं। उधर, दिल्ली से लौटते ही सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने डॉक्टरों से अपील की कि वे अहंकार छोड़ें और कल से काम पर लौटे। उन्होंने यह भी बताया कि वे कल सीनियर डॉक्टरों को बुलाकर उनसे बातचीत करेंगे और पूरे मामले में समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। सीएम ने साफ कहा कि सरकार पहले ही मामले में दोबारा जांच (री-इन्क्वायरी) का आश्वासन दे चुकी है, ऐसे में हड़ताल पर जाने का कोई औचित्य नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर इसके बावजूद डॉक्टर हड़ताल पर जाना चाहते हैं, तो सरकार इसमें कुछ नहीं कर सकती, लेकिन इससे आम लोगों को परेशानी हो रही है। डॉक्टर का मरीज के साथ व्यवहार ठीक नहीं था सीएम ने कहा कि सामने आए वीडियो और तथ्यों के आधार पर संबंधित डॉक्टर का मरीज के साथ व्यवहार ठीक नहीं था। सरकार का उद्देश्य किसी का करियर बर्बाद करना नहीं है, बल्कि व्यवस्था को सही करना है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने फैसलों की समीक्षा कई बार करती है और जरूरत पड़ने पर सुधार भी करती है। सीएम सुक्खू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर आईजीएमसी जैसे बड़े संस्थान में इस तरह की घटनाएं दोहराई जाती रहीं, तो लोगों का भरोसा अस्पतालों से उठ जाएगा और मरीज इलाज के लिए आने से भी कतराएंगे। मरीजों की बढ़ी मुश्किलें, ऑपरेशन टले हड़ताल के चलते प्रदेश के बड़े अस्पतालों में ओपीडी (OPD) सेवाएं लगभग ठप हैं। नियमित ऑपरेशन टाल दिए गए हैं, जिससे दूर-दराज से आए मरीजों को बिना इलाज के लौटना पड़ रहा है। वर्तमान में केवल आपातकालीन सेवाएं ही संचालित की जा रही हैं। गौरतलब है कि डॉक्टर राघव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के विरोध में रेजिडेंट डॉक्टर शुक्रवार से ही अवकाश पर चले गए थे और शनिवार से उन्होंने पूर्ण हड़ताल शुरू कर दी। 2 पॉइंट में जानिए पूरा मामला ​

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