हिमाचल हाईकोर्ट ने सांसद कंगना रनोट के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका में मुद्दे (इश्यू) तय कर दिए हैं। जस्टिस ज्योत्सना रिवाल दुआ ने सभी पक्षकारों की दलीलों पर यह मुद्दे तय किए। अब इन्हें साबित करने का जिम्मा भी संबंधित पक्ष पर छोड़ा है। पहले मुद्दे के अनुसार, याचिकाकर्ता लायक राम नेगी को साबित करना होगा कि उसने 15 मई 2024 (स्क्रूटनी की तय तारीख) पर अपने नॉमिनेशन पेपर्स के साथ ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ वास्तव में जमा था। अगर ऐसा किया था, तो इसका नॉमिनेशन पर क्या प्रभाव रहा। साथ ही यह साबित करना है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने 15 मई को ही उस सर्टिफिकेट की अनुपस्थिति के आधार पर याचिकाकर्ता का नामांकन गलत तरीके से रिजेक्ट किया और यह कानूनी त्रुटि थी। कंगना और चुनाव आयोग के ये साबित करना होगा वहीं प्रतिवादी कंगना और चुनाव आयोग को साबित करना होगा कि याचिकाकर्ता के नॉमिनेशन पेपर्स के साथ फॉर्म 26 के तहत बताए गए नो ड्यूज सर्टिफिकेट को न देना, रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट, 1951 के सेक्शन 36(4) के हिसाब से एक बड़ी कमी थी, जिस कारण याचिकाकर्ता का नामांकन कानून के अनुसार रिजेक्ट किया गया। याचिकाकर्ता को बताना होगा कि आयोग गलत ढंग से नॉमिनेशन रिजेक्ट किया कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा कि वह अपनी दलीलों से साबित करें कि उसके नॉमिनेशन पेपर्स को गलत तरीके से रिजेक्ट करने की वजह से, रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट, 1951 के सेक्शन 100 (1) (c) के तहत कंगना का चुनाव रद्द घोषित होना चाहिए। कोर्ट ने सभी पक्षकारों को इन मुद्दों को साबित करने के लिए अपने अपने गवाह और तथ्य पेश करने के आदेश दिए है। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से गवाहियां दर्ज करने के लिए तिथियां रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल द्वारा निर्धारित की जाएगी। किन्नौर निवासी ने दे रखी चुनौती बता दें कि, किन्नौर निवासी लायक राम नेगी कंगना के चुनाव को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। लायक राम नेगी के अनुसार, उसके नामांकन गलत तरीके से रद्द किया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने नामांकन के साथ सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने अगले दिन दिए गए नो-ड्यूज सर्टिफिकेट स्वीकार नहीं किए और इसे बड़ी त्रुटि बताते हुए उनका नामांकन खारिज कर दिया। इसी आधार पर उन्होंने मंडी लोकसभा चुनाव को रद्द कर दोबारा मतदान करवाने की मांग की है। अब पूरा मामला सिलसिलेवार पढ़िए…