हिमाचल प्रदेश में मंडी जिले के बालीचौकी विकास खंड के अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लोगों ने आरोप लगाया है कि 2011 की जनगणना के बाद उन्हें ओबीसी श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। उन्हें इस बात की जानकारी कई साल बाद सूचना के अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से मिली है। ओबीसी श्रेणी से बाहर किए जाने के बाद, इन लोगों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को डीसी मंडी से मिलने पहुंचे ओबीसी मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि 10 दिन के भीतर उन्हें फिर से ओबीसी श्रेणी में शामिल नहीं किया जाता है, तो वे सड़कों पर उतरकर चक्का जाम करेंगे। बालीचौकी ओबीसी मोर्चा के अनुसार, उनके ब्लॉक में 22 ऐसी पंचायतें हैं, जहां अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग रहते हैं। इनमें से 6 पंचायतों में 500 से अधिक ओबीसी परिवार हैं, लेकिन जनगणना में इन पंचायतों को ओबीसी श्रेणी में ‘शून्य’ दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त, शेष पंचायतों में भी सैकड़ों लोगों के नाम इस श्रेणी से हटा दिए गए हैं। हाईकोर्ट जाने की दी चेतावनी बालीचौकी ओबीसी मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष बीरी सिंह भारद्वाज ने बताया कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो वे अपने अधिकारों के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने अपनी मांगों का ज्ञापन डीसी मंडी के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल और प्रदेश सरकार को भेजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ओबीसी सूची बनाते समय सीधे तौर पर हेराफेरी की गई है और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। इस अवसर पर ओबीसी मोर्चा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट के उन आदेशों का पालन नहीं कर रही है, जिनमें ओबीसी श्रेणी को नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण कोटे की बात कही गई है। उन्होंने पदोन्नति के नियमों में भेदभाव को संशोधित करने और 27 प्रतिशत कोटे को सभी विभागों में लागू करने सहित अन्य मांगों को भी जल्द पूरा करने की मांग उठाई है।