हिमाचल किसान सभा ने केंद्र सरकार से वन संरक्षण कानून में संशोधन करने की मांग की है। सभा ने प्राकृतिक आपदा प्रभावितों को 90 प्रतिशत मुआवजा देने की भी अपील की है। यह मांग माकपा नेता और पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने मंडी में सीटू के बैनर तले आयोजित राज्य स्तरीय अधिवेशन के दौरान उठाई। हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2023 और 2025 में आई प्राकृतिक आपदाओं के बाद प्रभावितों के पुनर्वास का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। हिमाचल किसान सभा का यह अधिवेशन किसान सभा के राज्य अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसमें सैकड़ों आपदा प्रभावितों ने भाग लिया। वन संरक्षण अधिनियम का दुरुपयोग कर रहा केंद्र अधिवेशन के दौरान मीडिया से बात करते हुए राकेश सिंघा ने केंद्र सरकार पर वन संरक्षण अधिनियम के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम पूंजीपतियों के लिए फायदेमंद और देश के किसानों के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है, इसलिए इसमें संशोधन आवश्यक है। सिंघा ने इस बात पर जोर दिया कि आपदा में हर कोई प्रभावितों के प्रति हमदर्दी जता रहा है, लेकिन उन्हें ‘घर के बदले घर’ और ‘जमीन के बदले जमीन’ देने की बात कोई नहीं कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की हिमाचल यात्रा का भी जिक्र किया और कहा कि उनके ऐलान के बावजूद प्रभावितों को कोई मुआवजा नहीं मिला है। सिंघा ने कुछ स्थानीय नेताओं पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ये नेता हिमाचल के हकों के लिए बाधा बन रहे हैं और केंद्र सरकार की बात कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे नेताओं से आपदा प्रभावितों के साथ खड़े होने का आग्रह किया।

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