हिमाचल कैबिनेट के फैसले के बाद पंचायतीराज विभाग ने भी पंचायतों को री-ऑर्गेनाइज करने की तैयारी कर ली है। इस संदर्भ में विभाग ने आज (शनिवार को) सभी डीसी को एक पत्र लिखकर 15 दिन के भीतर पंचायतें री-ऑर्गेनाइज करने को मिले प्रस्ताव एग्जामिन करके निदेशालय भेजने को कह दिया है। बता दें कि, पंचायतीराज विभाग ने बीते साल री-ऑर्गेनाइज करने को पंचायतों से प्रस्ताव आमंत्रित किए थे। इसके बाद, विभाग ने पंचायतें री-ऑर्गेनाइज के प्रस्ताव सरकार को भेजे और अधिकांश पंचायतों में इसकी प्रक्रिया को पूरा किया। इस दौरान कई पंचायतें ऐसी थी जिनका कुछ एरिया एक विधानसभा और शेष एरिया दूसरे विधानसभा क्षेत्र में पड़ता था। इन्हें एक ही विधानसभा क्षेत्र में डाला गया। री-ऑर्गेनाइज के कुछ प्रस्ताव अभी भी लंबित अब सरकार व पंचायतीराज विभाग का दावा है कि कुछ प्रस्ताव अभी भी लंबित पड़े हैं। पंचायतीराज विभाग द्वारा डीसी को लिखे पत्र में कहा गया कि जुलाई से सितंबर के बीच आपदा के कारण स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य में जुटा रहा। इस वजह से कुछ पंचायतों के री-ऑर्गेनाइज के प्रस्ताव को कंसिडर नहीं किया जा सका। अब डीसी से प्रस्ताव आने के बाद सरकार री-ऑर्गेनाइज के प्रस्ताव पर फैसला करेगी। तय समय पर नहीं हो पाएंगे चुनाव जाहिर है कि आखिरी वक्त में री-ऑर्गेनाइज के इस फैसले के बाद हिमाचल में पंचायत चुनाव अब तय समय में नहीं हो पाएंगे। इससे स्टेट इलेक्शन कमीशन की तय समय में चुनाव कराने की तैयारियों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। दिसंबर में प्रस्ताव पंचायत चुनाव के लिए इलेक्शन कमीशन सारी तैयारियां पूरी कर चुका है। आखिरी चरण में वोटर लिस्ट का काम इसी क्रम में, वोटर लिस्ट बनाने का काम आखिरी चरण में है। मगर सुक्खू सरकार आखिरी वक्त में अब नई पंचायतें बनाने जा रही है। इससे सरकार की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि री-ऑर्गेनाइज के लिए इलेक्शन कमीशन लगभग एक साल पहले ही सरकार को लिख चुका था, ताकि चुनाव समय पर कराए जा सके। राज्य सरकार भी पहले चुनाव की तैयारी कर चुकी थी। इस वजह से पंचायतीराज विभाग से सचिव ने सभी डीसी को एक पत्र लिखकर 25 सितंबर तक हर हाल में आरक्षण रोस्टर लगाने के निर्देश दिए गए। 3577 पंचायतों में होने हैं चुनाव हिमाचल की 3577 पंचायतों में इसी साल दिसंबर में प्रधान, उप प्रधान, पंचायत वार्ड मेंबर, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद के लिए चुनाव होने है। इनके साथ साथ 73 नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम में भी मतदान होना है। इलेक्शन कमीशन 15 नवंबर के बाद कभी भी चुनाव की घोषणा कर सकता है। मगर सुक्खू कैबिनेट की बीते सप्ताह हुई मीटिंग में आखिरी वक्त में पंचायतों के पुनर्गठन का फैसला लिया है। इससे इन चुनाव पर संशय बन गया है। इन पंचायतों का कार्यकाल 23 जनवरी को पूरा हो रहा है। स्टेट इलेक्शन कमीशन को इससे पहले नई पंचायतों का हर हार में चुनाव कराना है।

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