हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आर्थिक हालत को आधार बनाकर समय पर एचआरटीसी कर्मचारियों के वित्तीय लाभ न देने पर एचआरटीसी प्रबंधन व राज्य सरकार के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि अदालती आदेशों के बावजूद कर्मचारियों को वित्तीय लाभ नहीं दिया गया, जो सरकार की उदासीनता को दर्शाता है। कोर्ट ने मामले को गम्भीरता से लेते हुए मुख्य सचिव को शपथपत्र दायर कर स्थिति स्पष्ट करने के आदेश दिए। कोर्ट ने ऐसा न करने पर सरकार पर 50 हजार रुपए कॉस्ट लगाने की चेतावनी भी दी है। एचआरटीसी के उन कर्मचारियों ने अनुपालना एवं अवमानना याचिकाएं दायर की हैं जिनके पक्ष में फैसला देते हुए हाईकोर्ट ने उन्हें एक वर्ष के अनुबंध के बाद नियमित करने और सभी सेवा लाभ जारी करने का फैसला सुनाया था। कोर्ट में दी गई ये दलील न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ के समक्ष अनुपालना व अवमानना याचिकाओं की सुनवाई के दौरान परिवहन निगम की ओर से बताया गया कि पिछले तीन महीने में प्रार्थी कर्मचारियों को बकाए के रूप में 13 करोड़ रुपए की रकम जारी की गई है और इसमें लगभग 634 लोग शामिल हैं। 50 करोड़ रुपए की एकमुश्त देने की मांग 427 कर्मचारियों को एक किस्त का भुगतान किया गया है जो कुल लाभार्थियों का लगभग 70% है। राज्य से यह भी अनुरोध किया गया है कि वह 50 करोड़ रुपए की एकमुश्त राशि प्रदान करे, या इसके विकल्प के तौर पर, हर महीने 2-3 करोड़ रुपए दे, ताकि कॉरपोरेशन लाभार्थियों के बकाया भुगतान को क्लियर कर सके। कोर्ट को यह भी बताया गया कि लाभार्थी कर्मियों को 100 करोड़ रुपए की बकाया राशि वित्तीय 31.03.2028 तक वितरित कर दी जाएगी, क्योंकि कॉरपोरेशन का मासिक राजस्व लगभग 60-70 करोड़ रुपए है।