हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल ढाई साल से बढ़ाकर 5 साल करने के फैसले पर शिमला नगर निगम की मासिक बैठक में जमकर हंगामा हुआ। बैठक के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के पार्षदों ने इस निर्णय का विरोध किया। भाजपा पार्षदों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं कांग्रेस के भी करीब 1 दर्जन पार्षदों ने भी इस फैसले का विरोध किया। भाजपा पार्षदों ने8से लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत बताया और कांग्रेस सरकार पर महिला विरोधी होने के आरोप लगाए। नगर निगम का ढाई-ढाई साल का रोस्टर बरकरार रहना चाहिए- पार्षद नाभा वार्ड की कांग्रेस पार्षद सिमी नंदा ने कहा कि वह सरकार और पार्टी के साथ हैं, लेकिन नगर निगम में जो रोस्टर ढाई-ढाई साल के लिए तय किया गया था, उसे बरकरार रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम सिर्फ इस फैसले के खिलाफ हैं क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की लाइन यही है कि सभी को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। वहीं कांग्रेस पार्षद कांता सुयाल ने कहा कि इस बार नगर निगम में महिलाओं की संख्या अधिक है, ऐसे में महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए था। उन्होंने बताया कि भाजपा पार्षदों ने अपने तरीके से विरोध किया, जबकि कांग्रेस पार्षदों ने मौन प्रदर्शन कर अपनी असहमति जताई। उन्होंने मांग की कि निगम में महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।