धर्मशाला के पास धौलाधार में लैंडस्लाइड से स्टारडोम कैंप क्षतिग्रस्त हो गया है। लैंडस्लाइड के कारण कैंप के कमरों में दरारें आ गई हैं, और यहां तक पहुंचने वाला संपर्क मार्ग भी पूरी तरह से टूट गया है। घटना धर्मशाला के निकट चोला गांव की है। पुराना कांगड़ा निवासी शिव सागर ने स्थानीय हंसराज और अन्य से 2.50 लाख रुपए वार्षिक किराये पर जमीन लेकर 36.75 लाख रुपए की लागत से पांच गुंबदनुमा ढांचे बनाए थे। इन ढांचों को शांगरीला, इंद्रहार, थमसर, तलांग और पराशर नाम दिए गए थे। यह कैंप दो साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन पर्यटन विभाग से इसका रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया। विभाग ने इस संबंध में कैंप प्रबंधन को दो बार समन भी जारी किए थे। जिला पर्यटन अधिकारी विनय धीमान ने बताया कि कैंप संचालक ने विभाग से कोई अनुमति नहीं ली थी। 30 सितंबर 2024 को केवल अनंतिम पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं, जिसके कारण पुनः समन जारी किया गया। लैंडस्लाइड की घटनाएं नई नहीं हुई-विभाग
राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, कैंप का निर्माण खाता नंबर 35, खतौनी 90-91, खसरा नंबर 173/176 की भूमि पर हुआ है। यह भूमि 1-03-57 हेक्टेयर क्षेत्रफल के साथ सरकारी भूमि से सटी हुई है। चोला गांव में लैंडस्लाइड की घटनाएं नई नहीं हैं। इससे पहले 9 अगस्त 2014 को यहां 11 परिवार मकान क्षतिग्रस्त होने के बाद विस्थापित हो चुके हैं। वहीं, 24 अगस्त 2018 को भी एक निर्माणाधीन मकान भारी लैंडस्लाइड हुआ था। यह गांव इंद्रुनाग पहाड़ी के ऊपर बसा है और यहां पहुंचने के लिए पांच किलोमीटर का कठिन पैदल मार्ग तय करना पड़ता है। हाल ही में हुई भारी बारिश के बाद लैंडस्लाइड से 11 अन्य मकानों में भी दरारें पड़ी हैं। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ सीस्मोलॉजी, देहरादून के एक अध्ययन के मुताबिक, यह इलाका सक्रिय लैंडस्लाइड प्रवण क्षेत्र में आता है। इसके बावजूद यहां लगातार निर्माण कार्यों की अनुमति दी जा रही है। हाल ही में आपदा प्रबंधन पर हुए एक सम्मेलन में विशेषज्ञों ने जिला प्रशासन को सक्रिय लैंडस्लाइड क्षेत्रों में निर्माण रोकने की सलाह दी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।